Monday, April 15, 2024
साहित्य जगत

एक गीत आप सुधीजनो……

एक गीत आप सुधीजनो को समीक्षार्थ समर्पित !!
प्रिये,तुम्हारे गाँव की वो अमराई कितनी प्यारी है !
जिसकी घनी छाँव में बहकी अल्हड़ प्रीति हमारी है !!
मौन निमंत्रण दे डाला तुमने मेरी तन्हाई को !
धीरे धीरे नाप लिया मेरे मन की गहराई को !
किया बहुत बेचैन मुझे ,खुद खोई नीद तुम्हारी है !!
अपलक देख रहा है तुमको मेरा ये वैरागी मन !
तेरे नेह भरे नयनो से बरस रहा रिमझिम सावन !
युग युग के हम बिछड़े साथी ,आज मिलन की बारी है !!
तेरी खातिर दुनियां की सारी खुशियाँ ठुकरा दूंगी !
साथी तेरे हर ग़म को मै अपने गले लगा लूंगी !
एक बार बस कह कर देखो “गीता ” सिर्फ हमारी है !!
गीता त्रिपाठी “गीता “
अम्बेडकर नगर
9451203694