Monday, April 15, 2024
साहित्य जगत

ग़ज़ल

ख़ुदआराई किसकी ख़ातिर ।
यह रानाई किसकी ख़ातिर ।।
चाक़ दिलोजाँ ही अच्छे थे ।
यह तुरपाई किसकी ख़ातिर ।।
क्यूँ रस्मों को तोड़ रहे हो ?
यह रुसवाई किसकी ख़ातिर ।
पहलू में इक दिल रक्खा है ।
यह शैदाई किसकी ख़ातिर ।।
शब भर क्यूँ जगते रहते हो ?
यह तन्हाई किसकी ख़ातिर ।।
“ग़ैर “बसा परदेश फ़ज़ाओं।
यह पुरवाई किसकी ख़ातिर ।।
अनुराग मिश्र ” ग़ैर “
जिला आबकारी अधिकारी