-महरीखावां निवासी राकेश त्रिपाठी ने उप मुख्य चिकित्साधिकारी से की शिकायत, कार्रवाई के आश्वासन के बाद स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
बस्ती। जनपद में केडी हॉस्पिटल को लेकर मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। अस्पताल प्रबंधन के कथित दुर्व्यवहार और चिकित्सीय लापरवाही को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार को अस्पताल पहुंचे महरीखावां निवासी राकेश त्रिपाठी ने प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि केडी हॉस्पिटल में चिकित्सीय परामर्श के सिलसिले में पहुंचने के बाद उन्होंने प्रबंधक से मुलाकात करने का प्रयास किया, लेकिन करीब एक घंटे तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला।
राकेश त्रिपाठी के अनुसार, वह सोमवार को दिन में किसी मरीज को दिखाने के लिए केडी हॉस्पिटल पहुंचे थे। इस दौरान वह अस्पताल के प्रबंधक से मिलने के लिए उनके कक्ष के दरवाजे पर पहुंचे। आरोप है कि काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद प्रबंधक ने दरवाजा नहीं खोला। राकेश त्रिपाठी ने प्रबंधक के शराब के नशे में धुत होने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है।
मामले को लेकर राकेश त्रिपाठी ने उप मुख्य चिकित्साधिकारी एस बी सिंह को दूरभाष के माध्यम से जानकारी दी। बताया जाता है कि शिकायत मिलने पर उप मुख्य चिकित्साधिकारी ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और आरोपों की जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
केडी हॉस्पिटल को लेकर मरीजों और उनके परिजनों की समस्याओं तथा कथित चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों के बीच एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका यह भी कहना है कि पूर्व में सामने आए मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ऐसी स्थितियां बनी हुई हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित मामलों के अभिलेख और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आना आवश्यक है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग किस प्रकार कार्रवाई करता है। यदि प्रबंधक के विरुद्ध लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
फिलहाल राकेश त्रिपाठी की शिकायत और उप मुख्य चिकित्साधिकारी के आश्वासन के बाद मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और स्वास्थ्य विभाग की जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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