-आमकोइल और मथौली के कोटेदारों का कारनामा, कब खुलेगी पूर्ति विभाग की कुम्भकरणी नींद, कहीं पूर्ति विभाग ने उपभोक्ताओं के हितों को भ्रष्ट कोटेदारों के साथ बेंच तो नहीं दिया है ?
बनकटी/बस्ती।(बीपी लहरी) पर्यवेक्षण और कार्यवाही के अभाव में बनकटी ब्लाक के कोटेदार बेलगाम होकर अपने मनमानियों को अन्जाम दे रहे हैं। जो जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और साफ नीयत पर सवाल खड़ा कर रहा है।
पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में कोटेदारों को प्रायोजित तरीके से उपभोक्ताओं के राशनों को हड़पने की जो परम्परा कायम हुई थी। वह परम्परा सत्ता परिवर्तन के बाद व्यवस्था में कुछ तब्दीली व सुधार हुई है। पहले हाट शाखा के गोदामों से दिनदहाड़े सरकारी साजिश से राशनों की लूट मची थी। सनद रहे कोटेदारों को लूटने की छूट देकर सांसद निर्वाचित कराने की ज़िम्मेदारी भी सौंपी गई थी। तब भी सरकारी तन्त्र मूकदर्शक बना रहा। लेकिन होंठों को खून लग जाने के कारण कोटेदार आज भी उपभोक्ताओं के राशनों में सेंधमारी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
ब्लाक क्षेत्र के आमकोइल और मथौली के कोटेदारों ने तो व्यवस्था की ऐसी तैसी करते हुए आरोप है कि तीन से पांच छह माह से अँगूठा लगवाने के बाद उपभोक्ताओं को देने की बजाय उनका राशन माफियाओं के हाथ बेंच लिया है। जिसकी भरपाई होना सम्भव नहीं है। फिर भी विभाग के जिम्मेदार सब कुछ जानकर मूकदर्शक की मुद्रा में है। ऐसी स्थिति में वहाँ के कुछ उपभोक्ता मजबूर होकर दूसरे स्थान से राशन उठान कर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदारों की कुम्भकरणी नींद नहीं टूटी। उपभोक्ताओं का आरोप है कि पूर्ति विभाग के जिम्मेदारों ने कहीं उपभोक्ताओं के हितों को भ्रष्ट कोटेदारों के हाथों बेंच तो दिया है ?. कुल मिलाकर पूर्ति विभाग मांस के मोटी का गिद्ध रखवार वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है।
इसके अलावा ब्लाक क्षेत्र में डड़वा लगुनी, कठैचा, पड़ियापार, पंखोबारी,भिटहा,तुरकौलिया, कबरा, बेहिल,मुन्डेरवा, किठूरी, चित्राखोर,थाल्हापार,अमरडोभा,छबिलहा,समेत क्षेत्र के अधिकाँश कोटेदार उपभोक्ताओं के राशनों को मनमानी तरीके से कटौती करने की परम्परा कायम कर चुके हैं।जो पूर्ति विभाग के लिए एक चुनौती है।
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