बस्ती। शिक्षा को केवल किताबों, पाठ्यक्रम और परीक्षा के अंकों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने के अभिनव प्रयासों के लिए सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, बस्ती को दिल्ली में 7 सितंबर को ‘उत्कृष्ट सामाजिक प्रभाव’ सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान विद्यालय की ऐसी शिक्षण पद्धति को पहचान देता है, जिसमें व्यावहारिक शिक्षा, आलोचनात्मक चिंतन, वित्तीय साक्षरता और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान पर विशेष जोर दिया जाता है।
विद्यालय में विद्यार्थियों को विषयों की जानकारी केवल पुस्तकीय ज्ञान के रूप में नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन से जोड़कर समझाया जाता है। चक्रवृद्धि ब्याज को केवल सूत्र के माध्यम से पढ़ाने के बजाय विद्यार्थियों को यह बताया जाता है कि निवेश पर मिलने वाले ब्याज को दोबारा निवेश करने से समय के साथ धन में किस प्रकार वृद्धि होती है। इसी तरह साधारण ब्याज, मासिक किस्त और ऋण के उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को वित्तीय निर्णयों की समझ विकसित करने का प्रयास किया जाता है। उन्हें यह भी समझाया जाता है कि निर्धारित मासिक किस्त से अतिरिक्त भुगतान करने पर ऋण की अवधि और कुल ब्याज को कम करने में मदद मिल सकती है।
गणित को रोचक और उपयोगी बनाने के लिए पिज्जा जैसे रोजमर्रा के उदाहरणों के माध्यम से भिन्न की अवधारणा समझाई जाती है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उत्तर याद कराने के बजाय विषय को व्यवहारिक रूप से समझाना है।
विद्यालय की पहल कक्षा तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को जिलाधिकारी कार्यालय का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझा। उन्हें यह जानने का अवसर मिला कि जिलाधिकारी के समक्ष समाज से जुड़ी किस प्रकार की समस्याएं आती हैं और प्रशासन उनके समाधान के लिए किस प्रक्रिया से काम करता है।
इसी क्रम में विद्यार्थियों को स्थानीय पुलिस थाने का भी भ्रमण कराया गया। वहां उन्होंने शिकायत दर्ज होने की प्रक्रिया, पुलिस की भूमिका तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के समाधान की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की।
विद्यालय खेलों को भी सीखने का माध्यम बना रहा है। आईपीएल जैसे बड़े खेल आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को खेल के पीछे काम करने वाले व्यवसाय मॉडल, टीम प्रबंधन, प्रचार, प्रायोजन और आर्थिक गतिविधियों की जानकारी दी जाती है।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि विद्यार्थी को केवल सही उत्तर पता होना पर्याप्त नहीं है। उसमें सही प्रश्न पूछने, समस्या को समझने, निर्णय लेने और समाधान खोजने की क्षमता भी विकसित होनी चाहिए। ‘उत्कृष्ट सामाजिक प्रभाव’ सम्मान इसी सोच और प्रयास की पहचान है। विद्यालय का लक्ष्य विद्यार्थियों को परीक्षा के साथ-साथ जीवन की वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार करना है, ताकि वे भविष्य में परिवार, समाज और देश के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें।
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