-मेधावी छात्रों के लिए निःशुल्क लाइब्रेरी से लेकर रोजगार, डिजिटल गांव, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सहायता और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तक, जनसेवा के अनेक अभियानों से चर्चा में हैं पहल एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक मनीष मिश्रा।
बस्ती। समाज सेवा केवल भाषणों और वादों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका वास्तविक स्वरूप तब दिखाई देता है जब जरूरतमंदों की मदद बिना किसी भेदभाव के की जाए। बस्ती जनपद में पहल सोशल वेलफेयर एंड एजूकेशनल सोसायटी के संस्थापक मनीष मिश्रा द्वारा किए जा रहे जनहित के कार्यों ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास और डिजिटल तकनीक जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उन्होंने कम समय में कई ऐसे कार्य किए हैं, जिनकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है।
हाल ही में उन्होंने वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के श्रीपालपुर निवासी कैंसर पीड़ित संजय कुमार के इलाज की जिम्मेदारी उठाते हुए उनका उपचार देश के प्रतिष्ठित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, नागपुर में कराने की व्यवस्था की। इससे पहले भी वे अनेक जरूरतमंद परिवारों की आर्थिक और सामाजिक सहायता कर चुके हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में मनीष मिश्रा की पहल विशेष रूप से सराहनीय मानी जा रही है। बस्ती शहर स्थित वीर सावरकर लाइब्रेरी में मेधावी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क अध्ययन की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को निःशुल्क टैबलेट उपलब्ध कराकर उनकी पढ़ाई को डिजिटल माध्यम से मजबूत करने का प्रयास किया गया है। उनका मानना है कि शिक्षा ही समाज में स्थायी परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है।
रोजगार के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय पहल करते हुए लगभग 100 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में सहयोग किया है। उनका कहना है कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना समाज के विकास की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और इसी दिशा में आगे भी लगातार प्रयास किए जाएंगे।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनीष मिश्रा ने बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों के गठन में सहयोग किया। इन समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया, ताकि महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें। इसके अलावा महिलाओं को सिलाई मशीन तथा जरूरतमंद परिवारों को प्रेशर कुकर वितरित कर उनके जीवन को आसान बनाने की दिशा में भी कार्य किया गया।
धार्मिक और सामाजिक समरसता से जुड़े अभियानों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। ‘रामजी का पेड़ा’ और ‘रामजी का झोला’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने का कार्य लगातार किया जा रहा है। इन अभियानों को समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग भी मिल रहा है।
मनीष मिश्रा की पहल से आयोजित एक सांस्कृतिक आयोजन के माध्यम से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज किया जा चुका है। अब वे एक और नए विश्व रिकॉर्ड की तैयारी में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सांस्कृतिक एकता और जनभागीदारी को बढ़ावा देते हैं।
युवाओं को खेलों से जोड़ने के उद्देश्य से उन्होंने बस्ती जनपद के प्रत्येक गांव में क्रिकेट टीम गठित करने और उन्हें क्रिकेट किट उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है। उनका विश्वास है कि खेल युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने अगले एक वर्ष के भीतर बस्ती जनपद के प्रत्येक गांव को डिजिटल बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इस अभियान के तहत गांवों में डिजिटल जागरूकता, ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी, तकनीकी प्रशिक्षण और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
मनीष मिश्रा का कहना है कि समाज सेवा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। यदि सभी सक्षम लोग अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करें तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनके अनुसार उनका उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है।
जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे इन कार्यों के कारण मनीष मिश्रा आज सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की एक नई पहचान बनकर उभरे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इसी प्रकार जनहित के कार्य निरंतर जारी रहे तो आने वाले समय में बस्ती विकास, शिक्षा, डिजिटल सशक्तिकरण और सामाजिक सहभागिता के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकता है।
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