Saturday, March 2, 2024
हेल्थ

22200 लोगों के ब्लड सैम्पल से फाइलेरिया का संक्रमण पता लगाने की पहल

गोरखपुर, 20 अगस्त 2023। जिले में फाइलेरिया (हाथीपांव) संक्रमण की स्थिति का पता लगाने के लिए 74 स्थानों पर नाइट ब्लड सर्वे अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत 22200 लोगों के ब्लड सैम्पल लिये जाएंगे। यह सैम्पल रात में आठ बजे से लेकर 12 बजे के बीच लिए जा रहे हैं। इनकी जांच 31 जुलाई के बाद की जाएगी । इस अभियान में पिपराईच ब्लॉक में फाइलेरिया मरीज सहायता समूह (पीएसजी) नेटवर्क सहयोग कर रहा है । जांच में मिलने वाले नये फाइलेरिया मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ने के साथ साथ पूरे जनपद को इस लाइलाज बीमारी से बचाने के लिए 10 से 28 अगस्त तक बचाव की दवा भी खिलाई जाएगी ।

जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने पत्र जारी कर नाइट ब्लड सर्वे के बारे में विस्तृत दिशा निर्देश दिये हैं । इन्हीं के क्रम में 37 लैब टेक्निशियन और उनके 111 सहयोगियों की मदद से यह सर्वे शुरू हुआ है जो 29 जुलाई तक चलेगा । जिला स्तर से 20 सहायक मलेरिया अधिकारी, मलेरिया इंस्पेक्टर और फाइलेरिया इंस्पेक्टर को गुणवत्तापूर्ण सर्वे के लिए लगाया गया है । अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम डॉ नंदलाल कुशवाहा के कुशल पर्यवेक्षण में ब्लॉक स्तर पर अधीक्षक और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी इस सर्वे का संचालन करवा रहे हैं ।

उन्होंने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे के बाद जो नये फाइलेरिया मरीज मिलेंगे, उनमें से हाइड्रोसील के मरीजों की सर्जरी करवाई जाएगी । हाथीपांव के मरीजों को एमएमडीपी किट देकर रोग प्रबन्धन की जानकारी दी जाएगी और व्यायाम का तरीका भी बताया जाएगा ताकि उनका रोग नियंत्रित रहे । हाथीपांव ठीक नहीं होता है लेकिन प्रबंधन और व्यायाम से इसे गंभीर होने से रोका जा सकता है । मरीज को आराम के लिए आवश्यकतानुसार दवाएं भी दी जाती हैं । जिले के सभी 19 ब्लॉक क्षेत्रों और 18 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्रों में यह सर्वे चलाया जा रहा है। पिपराईच ब्लॉक में फाइलेरिया मरीजों ने मिल कर मरीज सहायता समूह बनाया है और इस समूह के लोग सर्वे के दौरान समुदाय को जांच करवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं ।

*हो जाएंगे सतर्क*
पिपराईच ब्लॉक के महमूदाबाद गांव की निवासी रीना देवी (45) ने बताया कि उनके गांव में फाइलेरिया मरीज सहायता समूह की सदस्य कमलावती ने उन्हें इस बीमारी के बारे में बताया और रात में जांच करवाने के लिए प्रेरित किया । कमलावती से ही उन्हें पता चला कि यह बीमारी मच्छर काटने से होती है और एक बार हो जाने पर इसका इलाज नहीं हो सकता। यह भी पता चला कि अगर समय रहते बीमारी की पहचान हो जाए तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है । चूंकि गांव में पहले से ही इस बीमारी के रोगी हैं इसलिए रात में ब्लड की जांच करवा लिया है ताकि समय रहते इस बीमारी का पता चल सके और सतर्क हो जाएं।

*मिले थे तीन नये रोगी*
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2022 में छह ब्लॉक और दो शहरी क्षेत्रों में 4041 लोगों के ब्लड की रात में जांच की गयी थी जिनमें से तीन नये फाइलेरिया रोगी मिले थे। यह बीमारी मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है । इससे बचाव के लिए पांच साल तक लगातार साल में एक बार सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सामने बचाव की दवा खाना अनिवार्य है । यह दवा दो वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों (गर्भवती और अति गंभीर बीमार लोगों को छोड़ कर) को खानी है । इस बार एक से दो साल तक के बच्चों को भी पेट के कीड़े मारने की दवा खिलाई जाएगी।