– बोगुला में घुंघुर नृत्य एकेडमी का भव्य वार्षिक महोत्सव
नदिया। जिले के बोगुला स्थित कॉलेज पारा में घुंघुर नृत्य एकेडमी का चतुर्थ वार्षिक महोत्सव बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि तताई चक्रवर्ती, सर्मिस्था मुखर्जी, शंकर नारायण चक्रवर्ती, देवाशीष सरकार और रत्ना ढालि द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती को माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर पूरे परिसर में सांस्कृतिक ऊर्जा और भारतीय परंपरा की सुगंध देखने को मिली।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि भरतनाट्यम और कथकली की प्रसिद्ध गुरु सृजिता सरकार के कुशल निर्देशन में कलाकारों ने भारतीय संस्कृति, प्रकृति और राष्ट्रीय प्रतीकों को बेहद आकर्षक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। नृत्य-नाटिका के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा, राष्ट्रीय पक्षी मोर, राष्ट्रीय फूल कमल, राष्ट्रीय वृक्ष बरगद, राष्ट्रीय खेल हॉकी, राष्ट्रीय पशु रॉयल बंगाल टाइगर तथा भारतीय संगीत की प्रतीक वीणा जैसे प्रतीकों का ऐतिहासिक महत्व और गौरवपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया गया।
इस प्रस्तुति में श्रेया जोद्दार, समीर चक्रवर्ती, लाबोनि, दीक्षा राय, जीनिया सरकार, उत्सा विश्वास, सायंतिका टीकादार, अन्य विश्वास, सिद्धि विश्वास, मानवी मंडल और प्रियांश विश्वास समेत कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी सशक्त भागीदारी निभाई। उनके जीवंत अभिनय और तालमेल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में सृजिता सरकार और तनिमा सरकार द्वारा महान साहित्यकार रविंद्र नाथ टैगोर की रचना “राजपूत वीर” का मंचन भी किया गया, जिसमें राजपूतों के साहस, शौर्य और बलिदान को प्रभावशाली तरीके से दर्शाया गया। इसके अलावा सत्यजीत राय की प्रसिद्ध कृति “पाथेर पांचाली” पर आधारित प्रस्तुति ने भी दर्शकों को भावुक कर दिया।
राधा-कृष्ण वियोग, भक्ति रस, लोक नृत्य, नारी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर महिला जैसे विषयों पर आधारित प्रस्तुतियों में स्वाति विश्वास, रिंकी विश्वास, स्वागता विश्वास, जीना विश्वास, अवंतिका और निवेदिका आचार्या ने अपने भावपूर्ण नृत्य से दर्शकों का दिल जीत लिया। उनके प्रदर्शन में धैर्य, नेतृत्व और नारी शक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम में कथक गुरु मास्टर शिव, शालानी, आदित्य, सूरज, शिवांगी और रवि द्वारा “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसने भारतीय संस्कृति के वैश्विक संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
अंत में घुंघुर नृत्य एकेडमी के मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया। गुरु सृजिता सरकार को उनके अतुलनीय योगदान के लिए विशेष रूप से सराहा गया। उन्हें वर्ष 2016 में राष्ट्रीय नृत्य पावनी अवार्ड, 2020 में राष्ट्रीय सांस्कृतिक पुरस्कार, वीबीयू यूथ फेस्टिवल में “ए ग्रेट कलाकार” सम्मान, अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस कटक (उड़ीसा) में सम्मान तथा नृत्य श्री पुरस्कार जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
पूरे कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति और कला की जड़ें आज भी बेहद मजबूत हैं, और नई पीढ़ी इसे आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तत्पर है।
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