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2100 महिलाओं के सामूहिक सोहर गायन से गूंजेगा बस्ती, 24 मई को होगा पूर्वाभ्यास

25 मई को होगा ऐतिहासिक ‘राम जी का सोहर’ कार्यक्रम | 2100 से अधिक महिलाएं करेंगी सामूहिक सोहर गायन | ‘पहल’ संस्था के नेतृत्व में चल रही जोरदार तैयारियां | महिलाओं को वितरित की गई साड़ियां और आमंत्रण पत्र | गिनीज बुक रिकॉर्ड की दिशा में बढ़ता आयोजन

बस्ती। जनपद में आगामी 25 मई को आयोजित होने वाला भव्य ‘राम जी का सोहर’ कार्यक्रम अब ऐतिहासिक स्वरूप लेता नजर आ रहा है। जिले में आस्था, लोकसंस्कृति और मातृशक्ति के इस अद्भुत संगम को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। कार्यक्रम से पहले 24 मई को सामूहिक पूर्वाभ्यास आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होकर पारंपरिक सोहर गीतों का अभ्यास करेंगी। आयोजन को लेकर शहर से लेकर गांवों तक उत्साह का माहौल बना हुआ है और पूरा वातावरण राममय दिखाई दे रहा है।
इस विशेष आयोजन का नेतृत्व ‘पहल’ संस्था के संस्थापक मनीष मिश्रा कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में संस्था की टीम लगातार गांव-गांव, मोहल्लों और महिला समूहों के बीच पहुंचकर कार्यक्रम की जानकारी दे रही है तथा महिलाओं को इस सांस्कृतिक अभियान से जोड़ रही है। गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं के बीच साड़ी वितरण किया गया। साथ ही कार्यक्रम के आमंत्रण कार्ड भी वितरित किए गए। इस दौरान महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लेने का संकल्प लिया।
मनीष मिश्रा ने बताया कि 25 मई को होने वाले इस भव्य आयोजन में 2100 से अधिक माताएं और बहनें एक साथ भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव से जुड़े पारंपरिक ‘सोहर’ गीतों का सामूहिक गायन करेंगी। भारतीय लोक परंपरा में सोहर गीतों का विशेष महत्व माना जाता है। सामान्यतः ये गीत शुभ अवसरों और जन्मोत्सव पर गाए जाते हैं, लेकिन इतने बड़े स्तर पर सामूहिक रूप से सोहर गायन का आयोजन अपने आप में अनूठी और ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और नारी शक्ति को सम्मान देना भी है। बस्ती की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो यह आयोजन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।
कार्यक्रम स्थल को आकर्षक और भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा, पेयजल और महिलाओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन समिति के सदस्य लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं ताकि कार्यक्रम में शामिल होने वाली हजारों महिलाओं और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पूर्वाभ्यास को लेकर भी व्यापक रणनीति बनाई गई है। 24 मई को होने वाले रिहर्सल में महिलाएं एक स्वर में सोहर गायन का अभ्यास करेंगी, जिससे मुख्य कार्यक्रम को और अधिक भव्य बनाया जा सके। आयोजकों का मानना है कि सामूहिक स्वर में गूंजने वाले सोहर गीत न केवल धार्मिक वातावरण तैयार करेंगे, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा का जीवंत दर्शन भी कराएंगे।
कार्यक्रम को लेकर महिलाओं और युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से महिलाएं समूह बनाकर आयोजन में भाग लेने की तैयारी कर रही हैं। कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने भी कार्यक्रम में सहयोग देने की घोषणा की है। शहर के प्रमुख स्थानों पर कार्यक्रम के पोस्टर और आमंत्रण पत्र लगाए जा रहे हैं, जिससे लोगों में उत्सुकता लगातार बढ़ रही है।
आयोजकों ने जिलेवासियों से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनें और बस्ती की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने में सहभागी बनें। उनका कहना है कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्ती की सांस्कृतिक एकता, आस्था और मातृशक्ति के सम्मान का महोत्सव होगा।

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