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डिजिटल युग में एकाग्रता और अनुशासन से ही सफलता की राह

प्रधानाचार्या अपर्णा सिंह ने विद्यार्थियों को मोबाइल के संतुलित उपयोग का दिया संदेश

बस्ती। आधुनिक तकनीक ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किया है। स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों के जरिए विद्यार्थियों को घर बैठे देश-दुनिया की जानकारी और अध्ययन सामग्री आसानी से उपलब्ध हो रही है। हालांकि, तकनीक का जरूरत से अधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल विद्यार्थियों के लिए चुनौती भी बनता जा रहा है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनोरंजन और लगातार आने वाले मोबाइल नोटिफिकेशन पढ़ाई के दौरान बच्चों का ध्यान भटका रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग सुविधा के रूप में करने और अपनी एकाग्रता को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
लिटिल फ्लावर्स स्कूल, बस्ती की प्रधानाचार्या अपर्णा सिंह ने विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों के संतुलित इस्तेमाल की सलाह देते हुए कहा कि तकनीक विद्यार्थी की मददगार होनी चाहिए, उसकी दिनचर्या को नियंत्रित करने वाली नहीं। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए प्रतिभा के साथ एकाग्रता, अनुशासन और समय का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई के समय बार-बार मोबाइल देखना, सोशल मीडिया अपडेट चेक करना या नोटिफिकेशन का जवाब देना विद्यार्थियों की एकाग्रता को प्रभावित करता है। इससे पढ़े गए विषय को समझने और लंबे समय तक याद रखने की क्षमता भी कमजोर हो सकती है। इसलिए विद्यार्थियों को अध्ययन के दौरान अनावश्यक डिजिटल गतिविधियों से दूरी बनाकर पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
प्रधानाचार्या ने विद्यार्थियों को ‘डिजिटल डिटॉक्स’ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई, भोजन और विश्राम के समय मोबाइल फोन से दूरी बनाना उपयोगी आदत है। अध्ययन के दौरान गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद रखे जाएं और मोबाइल का इस्तेमाल केवल आवश्यकता के अनुसार किया जाए। इससे समय की बचत के साथ मन को भी अनावश्यक सूचनाओं से राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में उनकी दिनचर्या की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। देर रात तक मोबाइल या अन्य डिजिटल माध्यमों में व्यस्त रहने के बजाय समय पर सोना और सुबह जल्दी उठकर अध्ययन करना अधिक लाभकारी हो सकता है। पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या से विद्यार्थी मानसिक रूप से तरोताजा रहते हैं और पढ़ाई के दौरान बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
अपर्णा सिंह ने विद्यार्थियों को केवल किताबों और मोबाइल स्क्रीन तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए शारीरिक गतिविधियों को भी दिनचर्या में शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेलकूद, योग, प्रकृति के बीच समय बिताना और अच्छी पुस्तकों का अध्ययन बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास में सहायक है। इन गतिविधियों से रचनात्मक सोच विकसित होती है और पढ़ाई के दबाव को भी संतुलित करने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को डिजिटल अनुशासन सिखाना केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है। अभिभावकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। घर में मोबाइल और इंटरनेट के इस्तेमाल को लेकर सकारात्मक माहौल बनाना, बच्चों के साथ संवाद करना और उनके समय प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। विद्यालय और परिवार मिलकर विद्यार्थियों में आत्म-अनुशासन, जिम्मेदारी और डिजिटल विवेक की भावना विकसित कर सकते हैं।
प्रधानाचार्या ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे तकनीक से दूरी बनाने के बजाय उसका सही इस्तेमाल सीखें। इंटरनेट को ज्ञान का माध्यम बनाएं, सोशल मीडिया को अपनी पढ़ाई का विकल्प न बनने दें और अपने लक्ष्य को हमेशा प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में वही विद्यार्थी आगे बढ़ेंगे, जो तकनीक का इस्तेमाल अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए करेंगे और अपनी एकाग्रता को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि समय, एकाग्रता और अनुशासन सफलता की सबसे मजबूत नींव हैं। यदि विद्यार्थी इन तीनों का सही ढंग से उपयोग करना सीख लें तो डिजिटल युग की चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।

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