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संविधान की प्रस्तावना पढ़कर हुई शादी, बस्ती में अनोखे विवाह की चर्चा

बस्ती। जिले में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां पारंपरिक रस्मों की जगह भारतीय संविधान की प्रस्तावना को केंद्र में रखकर विवाह संपन्न कराया गया। मनकापुर के रहने वाले सुभाष वर्मा 6 मई को करीब 200 बारातियों के साथ बस्ती पहुंचे थे। दुल्हन अर्चना के परिवार ने बारात का स्वागत किया और सभी मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई, लेकिन इस शादी में न तो द्वारचार की रस्म हुई और न ही पारंपरिक आरती उतारी गई।
दूल्हा-दुल्हन सीधे जयमाल के लिए मंच पर पहुंचे। इस दौरान दूल्हे के साथ उनका 8 वर्षीय चचेरा भाई तन्मय भी शेरवानी पहनकर स्टेज पर मौजूद रहा। जयमाल के बाद दूल्हे के चाचा जैस वर्मा ने माइक से घोषणा की कि अब संविधान की प्रस्तावना पढ़कर विवाह की रस्म पूरी की जाएगी।
इसके बाद छोटे तन्मय ने हाथ में माइक लेकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़नी शुरू की। मंच पर मौजूद दूल्हा-दुल्हन समेत सभी बाराती प्रस्तावना को दोहराते रहे। “हम भारत के लोग…” से शुरू हुई प्रस्तावना के साथ पूरे समारोह का माहौल अलग और भावनात्मक हो गया।
बताया गया कि दूल्हे सुभाष वर्मा के पिता राम नारायण वर्मा का निधन वर्ष 2017 में हो चुका है। इसके बाद से सुभाष अपने चाचा जैस वर्मा और उनके बेटे तन्मय के साथ रहते हैं। इस अनोखी शादी में तन्मय की भूमिका खास रही।
दूल्हे के चाचा जैस वर्मा ने कहा कि आज समाज में धर्म और जाति के नाम पर विभाजन बढ़ रहा है। ऐसे समय में संविधान ही एक ऐसा दस्तावेज है जो सभी को समान अधिकार और न्याय देता है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद या अन्याय होता है तो अंततः सभी को संविधान की शरण में ही जाना पड़ता है, इसलिए उन्होंने विवाह की शुरुआत भी संविधान की प्रस्तावना से कराई।
उन्होंने कहा, “संविधान देश की आत्मा है। मेरा जन्म हिंदू समाज में हुआ, लेकिन मैं किस रास्ते पर चलूंगा यह मेरा अधिकार है। मैंने संविधान का रास्ता चुना है और उसी पर चलूंगा।”
इस अनोखे विवाह की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है और लोग इसे सामाजिक संदेश देने वाली नई पहल के रूप में देख रहे हैं।

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