बस्ती जनपद में विकास प्राधिकरण (बीडीए) की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि सत्तापक्ष के राजनीतिक प्रभाव के चलते प्राधिकरण के अधिकारी आंख-कान बंद किए बैठे हैं, जिससे खुलेआम मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताजा मामला बड़ेवन रोड स्थित संतकबीर आई हॉस्पिटल के सामने हो रहे एक अवैध निर्माण से जुड़ा है, जहां नियमों को दरकिनार कर दबंगई और पैसे के दम पर निर्माण कार्य तेजी से जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्माण पूरी तरह से नियमों के विपरीत हो रहा है। बिना मानचित्र स्वीकृति और निर्धारित मानकों के उल्लंघन के बावजूद करीब 10 फीट ऊंचा ढांचा खड़ा कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध निर्माण में बिजली के पोल को भी बाउंड्री के अंदर समेट लिया गया है, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि जन सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
क्षेत्रवासियों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि बीडीए की कार्रवाई केवल कमजोर और मध्यम वर्गीय लोगों तक ही सीमित रह जाती है। लोगों का आरोप है कि जिनके पास पैसा और राजनीतिक पहुंच है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। यही कारण है कि खुलेआम नियमों की अनदेखी कर निर्माण किया जा रहा है, लेकिन विभाग की ओर से कोई नोटिस तक जारी नहीं किया गया।
गौरतलब है कि कुछ ही दिनों पहले बीडीए ने घरसोहिया क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर चलाकर सख्त कार्रवाई की थी। उस समय विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए कई निर्माणों को ध्वस्त कर दिया था। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या बड़ेवन रोड पर हो रहे इस अवैध निर्माण पर भी वही सख्ती दिखाई जाएगी या फिर प्रभावशाली लोगों के सामने बीडीए घुटने टेक देगा?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर समय रहते इस निर्माण पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह एक गलत संदेश जाएगा और अन्य लोग भी नियमों को ताक पर रखकर निर्माण करने लगेंगे। इससे शहर की नियोजन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
बीडीए की चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या विभाग को इस अवैध निर्माण की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? अगर जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।
जनता अब यह जानना चाहती है कि क्या कानून सभी के लिए बराबर है या फिर रसूखदारों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए और दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएं।
अब देखना यह होगा कि बीडीए अपनी साख बचाने के लिए इस अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
BNT LIVE www.bntlive.com