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शादी का झांसा, गर्भवती होने पर गर्भपात का दबाव और जेवर लेकर भागने का आरोप, पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

बस्ती। परसरामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने गांव के ही अमित पुत्र घिसियावन पर शादी का झांसा देकर कथित रूप से संबंध बनाने, गर्भवती होने के बाद गर्भपात कराने का दबाव बनाने, घर के जेवर लेकर अपने साथ चलने के लिए बहकाने तथा बाद में उसे दूसरे स्थान पर ले जाकर कथित रूप से बेचने का प्रयास करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने पूरे मामले में परसरामपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं और पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़िता पूनम पत्नी संदीप के अनुसार, अमित भी शादीशुदा है। महिला का आरोप है कि अमित ने उसे यह भरोसा दिलाया कि वह अपनी पत्नी को तलाक देकर उससे शादी कर लेगा। इसी भरोसे के आधार पर दोनों के बीच संबंध बने। पीड़िता के मुताबिक जब वह गर्भवती हो गई तो अमित उस पर गर्भपात कराने के लिए दबाव डालने लगा।
महिला का आरोप है कि जब उसने गर्भपात कराने से इनकार किया तो अमित ने उसे बहकाते हुए कहा कि घर से जेवर और नकदी लेकर दोनों कहीं दूर भाग चलते हैं और बाद में साथ रहेंगे। पीड़िता का कहना है कि वह अमित की बातों में आ गई और घर के जेवर लेकर उसके साथ चली गई।
पीड़िता के अनुसार, इसके बाद उसे कटरा क्षेत्र के एक मैरिज हॉल में ले जाया गया, जहां कथित रूप से उसे बेचने का प्रयास किया गया। महिला का दावा है कि इस घटना के बाद उसे पूरे मामले की गंभीरता का एहसास हुआ और उसने पुलिस से मदद की गुहार लगाई।

पीड़िता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि जब उसने परसरामपुर पुलिस को घटना की जानकारी दी तो स्थानीय पुलिस ने कथित रूप से आरोपित के परिजनों से आर्थिक लाभ लेकर उसके साथ धोखे से सुलहनामा लिखवा लिया। यह आरोप पीड़िता ने लगाया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
महिला का कहना है कि जब उसे कथित सुलहनामे की जानकारी हुई तो उसने पुलिस अधीक्षक के समक्ष अपनी शिकायत रखकर न्याय की गुहार लगाई। पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद भी मामले को गंभीरता से लेने के बजाय परसरामपुर पुलिस ने उसका वीडियो बनाकर उच्चाधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास किया।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में वर्ष 2022 से अमित द्वारा कथित रूप से संबंध बनाए जाने, लगातार दबाव डालने और हाल की घटनाओं का भी उल्लेख किया है। तहरीर में उसने 14 सितंबर 2026 को गर्भपात की दवा दिलाए जाने तथा इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने का आरोप भी लगाया है। महिला के मुताबिक 16 सितंबर को उसे भारी ब्लीडिंग हुई। बाद में 20 सितंबर को अमित के उसके पास आने और 22 सितंबर को कथित मारपीट कर घर से निकालने की बात भी शिकायत में कही गई है।

मामले ने पुलिस की महिला सुरक्षा व्यवस्था और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता का कहना है कि यदि गंभीर आरोप लगाने वाली महिला को पुलिस स्तर पर ही न्याय नहीं मिल पाता है तो महिला सशक्तिकरण, महिला हेल्प डेस्क, पिंक बूथ और महिला थाने जैसी व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, पूरे मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। इसी तरह अमित पुत्र घिसियावन का पक्ष भी अभी सामने नहीं आ सका है। इसलिए उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों को फिलहाल पीड़िता के आरोप और शिकायत के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित घटनाओं में शामिल लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा उसे न्याय और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस मामले में पुलिस जांच बेहद महत्वपूर्ण है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। सुलहनामा किस परिस्थिति में कराया गया, पुलिस ने शिकायत पर क्या कार्रवाई की, कथित वीडियो किस उद्देश्य से बनाया गया और महिला द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों में कितनी सच्चाई है—इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी। पुलिस विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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