Saturday, June 22, 2024
बस्ती मण्डल

राजा नगर ने गुरिल्ला युद्ध में छुड़ाए थे अंग्रेजों के छक्के

नगर बाजार/बस्ती ( शकील खान) बस्ती मंडल मुख्यालय से | महज सात किमी बस्ती – आंबेडकरनर मार्ग स्थित नगर के राजा उदय प्रताप नारायण सिंह से अंग्रेजी हुकूमत भी थर्राती थी। कारण यह था कि राजा गुरिल्ला वार में बहुत ही मजे हुए योद्धा थे और उनके चुनिंदा साथियों ने ब्रितानिया हुकूमत की जड़ें हिला दिया था। यही कारण है कि ऐतिहासिक राजा नगर का नाम आज भी फख से लिया जाता है। नगर राज्य के राजा उदय प्रताप नरायण सिंह ने 1857 में अपने बहनोई अमोड़ा नरेश राजा जालिम सिंह के साथ मिलकर सरयू नदी के तट पर अपने सैनिकों को तैनात कर दिया और फैजाबाद से गोरखपुर की तरफ बढ़ रही अंग्रेज सैनिकों की नाव पर धावा बोल दिया और साथ सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। इन्हीं में से किसी तरह एक अंग्रेज सैनिक अपनी जान बचाकर गोरखपुर पहुंचा और 29 अप्रैल | 1858 को कर्नल राक्राप्ट के नेतृत्व में नगर किले पर आक्रमण कर दिया। अंग्रेजी सेना ने किले से
एक किलोमीटर दूर एक गांव के पास अपना डेरा डाला और किले को बारूद व तोपों से ध्वस्त कर दिया। राजा नगर तो अंग्रेजों के कब्जे में आ गए लेकिन सुरंग के जरिए गर्भवती रानी अठदमा गांव में अपने एक कारिंदे के घर छिप गईं। जिनके वंशज आज भी पोखरनी में निवास करते हैं। दूसरी तरफ राजा उदय प्रताप को गिरफ्तार कर गोरखपुर में केस चलाया गया। और अंग्रेज अधिकारियों के हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुना दी गई। अंग्रेजों ने उन्हें अपमानित करके फांसी देने की योजना बनाई तो इसकी भनक राजा को हो गई। उन्होंने अंग्रेजों के हाथ अपमानित होकर मरना स्वीकार नहीं किया और धोखे से पहरेदार के रायफल की संगीन अपने सीने में उतार कर मौत को गले लगा लिया। राजा के किले के ध्वंसावशेष आज भी नगर में मौजूद हैं। जिन पर आज भी देशप्रेमी शीश नवाते हैं।