Tuesday, May 21, 2024
हेल्थ

रंग ला रही फाइलेरिया सपोर्ट ग्रुप की पहल

मरीजों की कहानी सुन लोगों में फाइलेरिया के प्रति आ रही जागरूकता

गोरखपुर। फाइलेरिया मरीजों द्वारा बनाए गए पेशेंट सपोर्ट ग्रुप (पीएसजी) की पहल रंग ला रही है।मरीजों की दास्तान सुनकर फाइलेरिया बीमारी के प्रति समुदाय में सजगता का वातावरण बनने लगा है । जिले के पिपराइच ब्लॉक के उसका और महराजी गांव में यह ग्रुप सक्रिय हैं। स्वास्थ्य विभाग और ग्रुप के सदस्य गांव के शिक्षकों, प्रभावशाली लोगों, स्कूली बच्चों, राशन डीलर, मरीजों और ग्रामीणों तक इस बीमारी के बारे में जरूरी संदेश पहुंचा रहे हैं । पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सदस्यों की बैठकों के बाद लोग बीमारी की गंभीरता को समझने लगे हैं और जनजागरूकता का वातावरण तैयार होने लगा है।

उसका गांव के पूर्व ग्राम प्रधान 62 वर्षीय दशरथ गुप्ता का कहना है कि फाइलेरिया से बचाव की दवा का उन्होंने सेवन तो किया है लेकिन बीमारी की गंभीरता के बारे में नेटवर्क की बैठक में आने के बाद पता चला । बैठक में स्वास्थ्य विभाग और नेटवर्क के सदस्यों ने बताया कि गांव में पहले से हाथीपांव व हाइड्रोसील (फाइलेरिया) के मरीज हैं, इसलिए बीमारी के प्रसार को रोकना अधिक जरूरी है। यह प्रसार तभी रुकेगा जब मच्छरों से खुद का और समुदाय का बचाव किया जाए । इसके साथ ही पांच साल तक साल में एक बार फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए)अभियान के अन्तर्गत अवश्य किया जाए।

गांव की आशा कार्यकर्ता रंजना बताती हैं कि पेशेंट सपोर्ट ग्रुप बन जाने से मरीजों का दर्द और बीमारी की गंभीरता सामूहिक तौर पर सामने आने लगी है । इससे उनका कार्य भी आसान होगा और साल में एक बार जब एमडीए के दौरान दवा खिलाई जाएगी तो समुदाय की तरफ से भी अभियान में जुड़ाव दिखेगा ।समुदाय को बताया जा रहा है कि फाइलेरिया (हाथीपांव) की बीमारी लाइलाज है और इसे उचित देखभाल,दवा व व्यायाम से केवल नियंत्रित किया जा सकता है । इसके कारण होने वाले हाइड्रोसील बीमारी की शीघ्र पहचान कर सर्जरी कराई जा सकती है और यह ठीक भी हो जाता है।

*पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़ीं*

फाइलेरिया मरीज सुधा देवी (50) बताती हैं कि उन्हें 21 साल से बायें पैर में हाथीपांव की समस्या है और पिछले चार साल से दाएं पैर में भी हाथीपांव की दिक्कत आ गयी है । सपोर्ट ग्रुप का हिस्सा बनने के बाद ही उन्हें पता चला कि पिपराइच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से भी दवा पाना उनका अधिकार है । उन्होंने वहां से दवाएं लेनी शुरू कीं । ग्रुप में चर्चा के दौरान ही हाथीपांव का दर्द कम करने के व्यायाम के बारे में बताया गया । वह दीवार पकड़कर एड़ियों के भरोसे शरीर उठाती हैं और रोजाना दो बार इस व्यायाम को करने से उन्हें काफी आराम है । हाथीपांव की देखभाल के बारे में भी उन्हें ग्रुप में ही जानने को मिला ।

महराजी गांव के प्राथमिक विद्यालय की पांचवीं की छात्रा साधना बताती हैं कि उनके स्कूल में हाथीपांव के मरीज अकलू आए थे । उन्होंने समझाया कि यह बीमारी मच्छर के काटने से होती है । मच्छरों से बचाव करने और साल में एक बार पांच साल तक दवा खाने से बीमारी से बचा जा सकता है । स्कूल की प्रधानाचार्य पूर्णिमा, सीमा और शिक्षामित्र दीपू सिंह का कहना है कि दो बार उनके स्कूल में जनजागरूकता कार्यक्रम हुए हैं, जिससे बच्चों को और उन्हें भी फाइलेरिया के बारे में जानने को मिला और बच्चे भी घर जाकर इस बीमारी के बारे में चर्चा करने लगे हैं ।

*अस्पताल की सेवाओं की मिली जानकारी*

उसका गांव के प्रधान दीपक कुमार कश्यप (33) का कहना है कि ग्रुप के जरिये बीमारी के लक्षणों और अस्पताल की सेवाओं के बारे में जानकारी भी मिल रही है । अगर तेज बुखार के साथ शरीर में सूजन की समस्या हो तो यह फाइलेरिया भी हो सकता है । ऐसे मरीजों को तत्काल अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

*और भी गांवों में बनेगा नेटवर्क*

पिपराइच सीएचसी के अधीक्षक डॉ मणिशेखर ने बताया कि ब्लॉक के दो फाइलेरिया प्रभावित गांवों में पेशेंट सपोर्ट ग्रुप नेटवर्क बनाया गया है, बाकी गांवों में भी बनाया जाएगा। इस कार्य में स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) का सहयोग मिल रहा है । हेल्थ सुपरवाइजर रमेश को निर्देशित किया गया है कि वह ग्रुप का हर प्रकार से सहयोग करें। इस ग्रुप से न केवल इन गांवों में जागरूकता आएगी बल्कि इनका असर आस-पास के गांवों में भी देखने को मिलेगा ।