-भानपुर तहसील के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप स्थानीय मछुआरों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को पट्टा देने की साजिश। ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने दी हाईकोर्ट जाने की चेतावनी।
बस्ती। जनपद बस्ती के विकास खंड सल्टौआ गोपालपुर की ग्राम पंचायत कनेथू बुजुर्ग में एक विशालकाय सरकारी झील पर अवैध कब्जे और नियमों को ताक पर रखकर पट्टा आवंटन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस अवैध कब्जे के चलते पानी की प्राकृतिक निकासी रुकने से किसानों की हजारों बीघा फसल डूबकर पूरी तरह बर्बाद हो गई है जिससे आक्रोशित ग्रामीणों और पीड़ित किसानों ने जिलाधिकारी (DM) से लेकर मुख्यमंत्री तक न्याय की गुहार लगाई है।
ग्राम प्रधान सुमन द्वारा दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार कनेथू बुजुर्ग स्थित 56.660 हेक्टेयर क्षेत्रफल की इस झील गाटा संख्या 451 और 463 सहित 15गाटे के पट्टे का अधिकार तहसील स्तर की समिति को है ही नहीं। राजस्व संहिता के अनुसार 5 हेक्टेयर से अधिक की झील का आवंटन केवल जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति ही कर सकती है। इसके बावजूद भानपुर तहसील प्रशासन अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर गुपचुप तरीके से फाइल चला रहा है। आरोप है कि स्थानीय मत्स्य जीवी समुदाय को दरकिनार कर बिना किसी सार्वजनिक मुनादी के दूसरे ब्लॉक की बाहरी समितियों को पट्टा देने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पट्टा अभी पूर्णतः स्वीकृत भी नहीं हुआ है लेकिन बाहरी दबंगों ने झील पर अवैध रूप से कब्जा करना शुरू कर दिया है। दबंगों ने सरकारी भूमि पर टीन शेड लगा दिए हैं और जल निकासी के लिए पूर्व में लगा सरकारी बम्मा (पाइप) उखाड़ कर वहां मिट्टी डाल दी है। प्राकृतिक बहाव रुकने से आसपास के किसानों के खेतों में भयंकर जलभराव हो गया है जिससे उनकी खून-पसीने की कमाई यानी हजारों बीघा फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।
*FIR दर्ज करने और पट्टा निरस्त करने की प्रमुख मांगें*
दिनांक 7 अक्टूबर 2026 को डीएम एसडीएम (भानपुर) सहित सीडीओ और एसपी को भेजे गए आपत्ति पत्र में ग्राम पंचायत ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं
पीड़ित ग्रामवासियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर प्रकरण में तत्काल रोक नहीं लगाई गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे मजबूर होकर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे। इसके साथ ही वे फसल बर्बादी के मुआवजे की भी मांग करेंगे जिसकी संपूर्ण विधिक एवं आर्थिक जिम्मेदारी तहसील प्रशासन भानपुर की होगी। प्रशासन को लिखे गए इस पत्र पर ग्राम प्रधान के साथ-साथ दर्जनों ग्रामीणों और पीड़ित किसानों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस बड़े मामले में किसानों की बर्बादी पर कब संज्ञान लेता है और लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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