Saturday, July 20, 2024
साहित्य जगत

लोकतंत्र में अब लगता है…..

लोकतंत्र में अब लगता है सब बातें बेमानी हैं।
झूठे वादों नारों से बनती नित नयी कहानी हैं।।
जनता को धरना प्रदर्शन का कोई अधिकार नही,
जो भी रोजी -रोटी माँगे उसको लाठी खानी है।।
सच कहने सुनने की आदत अब लोगों में नही रही
नैतिकता मानवता वाली बातें हुयी पुरानी हैं।।
लोकतंत्र का चौथा खम्भा भी अब तो कमजोर हुआ।
सत्ता जैसा चाहे उसको वैसी खबर दिखानी है।।
सत्ता के मद में जब कोई राजा तानाशाह हुआ।
इसकी कीमत हर युग में जनता को पड़ी चुकानी है।।
जगदम्बा प्रसाद “भावुक
बस्ती (उत्तर प्रदेश)