Monday, April 15, 2024
हेल्थ

डेंगू नियंत्रण और बचाव में सामुदायिक भागीदारी पर मंथन, राष्ट्रीय स्तर के चार्टर का हिस्सा बनेंगी लर्निंग्स

गोरखपुर, क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आरएमआरसी) और स्वयंसेवी संस्था ड्रग्स फॉर नेगलेक्टेड डिजीज इनीशिएटिव (डीएनडीआई) ने विषय विशेषज्ञों, समुदाय और हितधारकों को डेंगू के मौसम के पहले एक मंच पर लाने की पहल की है । इसी कड़ी में चरगांवा ब्लॉक सभागार में डेंगू जनजागरूकता कार्यशाला ‘‘सामुदायिक भागीदारी, सबकी जिम्मेदारी’’ का आयोजन कर बीमारी, बचाव और सामुदायिक भूमिका के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी । कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों और हितधारकों से उनके व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किये गये जिनकी मदद से राष्ट्रीय स्तर का चार्टर बनेगा। आगामी मई 2024 को नई दिल्ली में डेंगू संबंधित प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्यक्रम में यह चार्टर प्रमुख भूमिका निभाएगा । कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किया और बीमारी के विभिन्न पक्षों के बारे में सवाल भी पूछे।

कार्यक्रम में पहुंचे गोरखपुर मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ नरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक पखवाड़े के दौरान मच्छरों के स्रोतों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने पर विशेष जोर है । लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि बुखार होने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल में जांच कराएं । इस तरह मच्छरजनित बीमारियों से बचाव पर सरकारी तंत्र प्रयास कर रहा है । आरएमआरसी के निदेशक डॉ कृष्णा पांडेय ने सामुदायिक सहभागिता पर जोर दिया और कहा कि डेंगू की समय से पहचान और चिकित्सक से सम्पर्क बेहद जरूरी है । इस बीमारी की प्रसार दर हमेशा से चिंता का विषय रही है । इससे बचाव के उपाय में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ साथ समाज के सभी हितधारकों की अहम भूमिका है।

आरएमआरसी के पूर्व निदेशक डॉ रजनीकांत ने कहा कि डेंगू का कोई इलाज नहीं होता है । इसका सिर्फ लाक्षणिक उपचार संभव है । संभावित डेंगू की समय से पहचान कर चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाना मरीज की जीवनरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के पूर्व निदेशक डॉ पीके श्रीवास्तव ने प्रस्तुति के जरिये डेंगू के कारण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी । उन्होंने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना बहुत जरूरी है । डेंगू मरीज का समय से सही जगह पर संदर्भन, इससे होने वाली जटिलताओं को रोकने में कारगर है।

वेक्टर बोर्न विशेषज्ञ डॉ बीएन नागपाल ने कहा कि डेंगू मादा मच्छर का काटने से होता है। यह मच्छर दिन के समय काटता है और इसे पनपने के लिए थोड़ा सा साफ पानी भी पर्याप्त है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ राजकिशोर सिंह ने कहा कि तेज बुखार और जोडों में दर्द इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। डेंगू के गंभीर मामलों में पल्स रेट 120 तक चला जाता है, रुक रुक कर बुखार आता है और प्लेटलेट दस हजार से नीचे चला जाता है ।

इस मौके पर मंडलीय किट विज्ञानी डॉ वीके श्रीवास्तव, गोरखपुर के जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह, सहायक जिला मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ धनंजय कुशवाहा, ब्लॉक विकास अधिकारी सत्यप्रकाश सिंह, स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी मनोज कुमार, जेई एईएस कंसल्टेंट डॉ सिद्धेश्वरी समेत आरएमआरसी के प्रतिनिधिगण, एएनएम और आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं । कार्यक्रम में डीएनडीआई के प्रतिनिधिगण ने विशेष सहयोग प्रदान किया ।

*बचाव और उपचार में कारगर होंगी सीख*

कार्यशाला का मुख्य जोर देश में डेंगू की गंभीर चुनौती से निपटने के लिए समुदाय के साथ जुड़ने, सीखने और काम करने की आवश्यकता पर बल देना है। इसके जरिये नीति निर्माताओं की आवश्यकताओं को समझने और समुदाय में जनजागरूका का स्तर बढ़ाने में मदद मिलती है।इसकी सहयोगी संस्था डीएनडीआई ने वर्ष 2003 में अपनी स्थापना के बाद से ही विश्व में सार्वजनिक और निजी भागीदारी के साथ मिल कर तेरह नये उपचार में योगदान दिया है। यह संस्था उपेक्षित बीमारियों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और किफायती उपचार के लिए अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य कर रही है । इसकी मदद से डेंगू, बाल एचआईवी चिकित्सा, उन्नत एचआईवी रोग और हेपेटाइटिस सी समेत कई अन्य बीमारियों के लिए दवाएं विकसित की जा रही हैं।