Wednesday, February 28, 2024
बस्ती मण्डल

इस्लामिक नया साल शुरू होते ही मुस्लिम मुहल्लों में मातमी धुनों पर ढोल ताशे सुनाई देने लगे

नगर बाजार/बस्ती(शकील खान) जिले में मोहर्रम के जुलूस की तैयरियां बखूबी देखने को मिल रही हैं। इस्लामिक नया साल शुरू होते ही मुस्लिम मुहल्लों में मातमी धुनों पर ढोल ताशे सुनाई देने लगे हैं।

पैगम्बर हजरत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की याद में मस्जिद और मुहल्लों में जंगनामे पढ़े जा रहे हैं। जिनमें इमाम हुसैन की बहादुरी, हक डटे रहना और मरसिए पढकर फातिहा दिलाई जा रही है।सन 61 हिजरी (680वीं) में इराक के कर्बला में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुस्सैन समेत उनके 72 साथी शहीद हो गए थे. यह जंग इराक के कर्बला में यजीद की सेना और हजरत इमाम हुसैन के बीच हुई थी. इस जंग में इमाम हुस्सैन ने इस्लाम की रक्षा के अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी थी. इमाम हुसैन और उनके साथियों के शहादत के गम में ही मुहर्रम मनाया जाता है. इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए मुहर्रम का महीना गम का महीना होता है। नगर थाना क्षेत्र में कुल 135ताजिया बैठाई जा रही है।जिसमे नगर बाजार,मैनहिया,बिरऊपुर, पोखरनी,टेमा, बकैनिया, रजली, दयालपुर, खडौआ, मदारपुर, पोखरा बाजार, ढोढऊपुर, रमवापुर समेत तमाम ग्रामीण क्षेत्रों में लोग ताजिया बनाने में लगे हैं। इन जगहों पर शाम होते ही ढोल ताशों की आवाज व या हुसैन की सदाओं से इलाका गूंज रहा है।
नगर बाजार जामा मस्जिद के ईमाम मौलाना अब्दुलहई ने बताया कि 14सौ साल पहले ईराक़ मे यजीद नाम का जालिम बादशाह जो इंसानियत का दुश्मन था। खुद को मुसलमानो का रहनुमा मानता था। वह चाहता था कि ईमाम हुसैन अपना रहनुमा हमे मान लें। ईमाम हुसैन को यह मंजूर नही था। उन्होंने अत्याचार व जुल्म के खिलाफ आवाज उठाया तो यजीद को नागवार लगा और उसने ईमाम हुसैन व उनके 72साथियों को हर तरह से प्रताड़ित किया। और तीन दिन भूखा प्यासा रखकर कत्ल कर डाला। यजीद ने सोंचा कि अब पूरी दुनिया हमे अपना खलीफा मानेगी, लेकिन ऐसा नही हुआ। हुसैन कत्ल होकर भी जीत गये और यजीद जीत कर भी हार गया। इसी याद को ताजा करने के लिए मोहर्रम की दस तारीख को ताजिया जुलूस निकालकर ईमाम हुसैन की याद मनाई जाती है।दुनिया को यह पैगाम दिया जाता है कि जुल्म सहो नही बल्कि जुल्म के खिलाफ आवाज उठाओ जीत हक की होती है।