अद्भुत व्यक्तित्व के स्वामी डाॅ राजीव गौड़ - BNT LIVE

अद्भुत व्यक्तित्व के स्वामी डाॅ राजीव गौड़

शास्त्र कहते हैं” अनन्तपारम् किल शब्दशास्त्रम् स्वल्पम् तथाऽऽयुर्बहवश्च विघ्नाः”!ये रिचा डाॅ राजीव गौड़ जी को बहोत अच्छे से परिभाषित करती है! पिछले दिनों इनसे मिलकर और बात करके मैं हैरान रह गया! अद्भुत व्यक्तित्व, अद्भुत सरलता, अद्भुत सौम्यता देख कर मैं हैरान हुआ कि आज भी इतने शानदार लोग उपस्थित है हमारे बीच!
मनुष्य इतना धोखेबाज है कि वह अपनी ही बातों से स्वयं को धोखा देने में समर्थ हो जाता है। ईश्वर की बहुत चर्चा करते-करते तुम्हें लगता है ईश्वर को जान लिया। इतना जान लिया ईश्वर के संबंध में, कि लगता है ईश्वर को जान लिया। लेकिन ईश्वर के संबंध में जानना ईश्वर को जानना नहीं है।
साधारण जीवन में हम ऐसे व्यक्तियों से मिलते हैं जो बहोत छिछला जीवन जीते हैं जुगनू की चमक को सूरज का ताप समझने लगते हैं! लेकिन हम सभी के बीच डॉ राजीव गौड़ जी जैसे लोग भी हैं जो पिछले काफी सालों से डाॅ राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय मे coordinator के पद पर कार्यरत हैं! अत्यंत ज्ञानी होने के बाद बहोत ही ज़मीन से जुड़े हुए व्यक्तित्व के स्वामी हैं! अत्यंत मधुर भाषी होने के साथ-साथ बेहद सहज और सरल रहते हैं!
कहते हैं कि भरी महफ़िल में जो शख्स तुमसे झुककर मिला होगा, यकीनन उसका कद तुमसे बड़ा होगा!
बुद्ध कहते हैं कि अगर जानना ही हो तो परमात्मा के संबंध में मत सोचो, अपने संबंध में सोचो। क्योंकि मूलतः तुम बदल जाओ, तुम्हारी आंख बदल जाए, तुम्हारे देखने का ढंग बदले, तुम्हारे बंद झरोखे खुलें, तुम्हारा अंतर्तम अंधेरे से भरा है रोशन हो, तो तुम परमात्मा को जान लोगे। फिर बात थोड़े ही करनी पड़ेगी।

ज्ञान मौन है। वह गहन चुप्पी है। फिर तुमसे कोई पूछेगा तो तुम मुस्कुराओगे। फिर तुमसे कोई पूछेगा तो तुम चुप रह जाओगे। ऐसा नहीं कि तुम्हें मालूम नहीं है, वरन अब तुम्हें मालूम है, कहो कैसे? गूंगे केरी सरकरा। कहना भी चाहोगे, जबान न हिलेगी। बोलना चाहोगे, चुप्पी पकड़ लेगी। इतना बड़ा जाना है कि शब्दों में समाता नहीं। पहले शब्दों की बात बड़ी आसान थी। जाना ही नहीं था कुछ, तो पता ही नहीं था कि तुम क्या कह रहे हो।
मुझे एक डाॅ राजीव गौड़ से संवाद करने का मौका मिला और उनकी बात सुनकर मुझे बुद्घ का दर्शन याद आ रहा था! भाषा शीलता को इस पद पर आकर भी इतनी सौम्यता से कायम रखना बहोत शानदार उपलब्धि है! आज़ हमे ऐसे ही मार्गदर्शक, और प्रशासक की आवश्यकता है राजीव गौड़ जी की तरह जो समाज के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आए!

अनुराग पाठक

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)