निक्षय दिवस कल, टीबी सहित चार रोग के मरीज होंगे चि्ह्तित - BNT LIVE

निक्षय दिवस कल, टीबी सहित चार रोग के मरीज होंगे चि्ह्तित

बस्ती, 14 जनवरी 2023। निक्षय दिवस को अब एकीकृत निक्षय दिवस के रूप में जाना जाएगा। इस बार का आयोजन 16 तारीख को होगा। दिवस पर अब टीबी के साथ ही फाइलेरिया, कुष्ठ रोग, कालाजार वाले मरीजों की पहचान कर उनके इलाज का प्रबंध किया जाएगा। प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लिए दिसम्बर 2022 से निक्षय दिवस का कार्यक्रम शुरू किया गया, इसका आयोजन हर माह की 15 तारीख को होता है। इस माह की 15 तारीख को रविवार होने के कारण आयोजन अगले दिन किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी मिश्र ने जूम मीटिंग कर तैयारी बैठक की। उन्होंने बताया कि जिले की सभी स्वास्थ्य इकाईयों पर इसका आयोजन होना है। जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, ओपेक अस्पताल कैली, सीएचसी, पीएचसी, अर्बन हेल्थ पोस्ट व 153 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। 10 प्रतिशत मरीज की टीबी की जांच कराई जाएगी। जिस मरीज में कुष्ठ रोग, फाइलेरिया के लक्षण होंगे, उनकों चि्ह्तित कर इलाज के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसी के साथ पहले से जिन टीबी मरीज का इलाज चल रहा है, उनका पेंडिंग लाभ दिलाया जाएगा। अगर उनकी कोई जांच व परिजनों की स्क्रीनिंग शेष है तो उसे भी पूरा कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गृह भ्रमण कर संभावित मरीज को निक्षय दिवस पर स्वास्थ्य इकाईयों पर पहुंचकर जांच कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

यह है इन रोगों के लक्षण-
क्षय रोग
दो सप्ताह या अधिक समय से खांसी आना, बुखार बना रहना, बलगम में खून आना छाती में दर्द होना, रात को पसीना आना, हर समय थकान महसूस होना, ठंड लगना, वजन घटना, भूख में कमी आदि।

कालाजार
इस बीमारी में दो हफ्तों से ज्यादा बुखार रहता है, जो मलेरिया या किसी भी एंटीबायोटिक दवा से ठीक नहीं होता है। इसके अलावा तिल्ली एवं जिगर का बढ़ जाना, रक्त की कमी, वजन में गिरावट एवं भूख न लगना जैसे लक्षण होते हैं।

कुष्ठ रोग
मांसपेशियों की कमजोरी, हाथ और पैर का सुन्न होना।
इस रोग के दौरान मुख्य रूप से त्वचा और नसों पर हमला होता है और त्वचा विकृत हो जाती है, क्योंकि त्वचा पर कई गांठ, घाव आदि होते हैं।

फाइलेरिया
बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या होती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) भी फाइलेरिया के लक्षण हैं। हाथ और पैरों में अत्यधिक सूजन आ जाती है, इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव भी कहा जाता है।