सावित्रीबाई फुले द्वारा स्थापित विद्यालय को शुरू कराना सच्ची श्रद्धांजलिः पूर्वान्चल करेगा आर्थिक सहयोग- डा. वी.के. वर्मा - BNT LIVE

सावित्रीबाई फुले द्वारा स्थापित विद्यालय को शुरू कराना सच्ची श्रद्धांजलिः पूर्वान्चल करेगा आर्थिक सहयोग- डा. वी.के. वर्मा

जयन्ती पर महिला शिक्षा की अलख जगाने वाली सावित्रीबाई फुले को किया नमन्

बस्ती । मंगलवार को अंग्रेजी हुकूमत में महिला शिक्षा की अलख जगाने वाली सावित्रीबाई फुले को उनकी जयन्ती पर याद किया गया। अर्जक कल्याण ट्रस्ट द्वारा डा. आलोक रंजन वर्मा के संयोजन में गौतमबुद्ध मुराली देवी बालिका इण्टर कालेज गोटवा के सभागार में आयोजित गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये वरिष्ठ चिकित्सक डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि यह आश्चर्य का विषय है कि सावित्रीबाई फुले ने जिस विद्यालय से महिला शिक्षा की नींव डाली थी उसकी स्थिति जर्जर है। कहा कि 1848 में महाराष्ट्र के पुणे में उन्होंने देश के पहले बालिका स्कूल की स्थापना की थी. ये स्कूल पुणे में है, लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर की हालत बेहद खराब है, पुराने पुणे शहर में भिड़ेवाड़ा में महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने 175 साल पहले महिला स्कूल शुरू किया था, लेकिन बरसों से ये स्कूल बंद है और इसकी हालत देख लगता है कि किसी भी पल ये इमारत ढह जाएगी कहा कि उनका प्रयास होगा कि पूर्वान्चल के लोग आर्थिक रूप से सहयोग कर बंद विद्यालय को शुरू कराये और उसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाय। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


अर्जक संघ महिला शाखा की अध्यक्ष कमलेश यादव ने कहा कि भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाजसेवी सावित्रीबाई फुले समाज सुधारक और महिलाओं के लिए काम करने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने 19वीं शताब्दी में पुणे (महाराष्ट्र) के समाज में व्याप्त दमनकारी सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा। चौधरी श्यामलाल पटेल ने कहा कि ज्योतिराव फुले के साथ उन्होंने लड़कियों के लिए 18 स्कूल खोले थे। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1852 में महिला सेवा मंडल खोला। ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर उन्होंने गर्भवती बलात्कार पीड़ितों के लिए एक देखभाल केंद्र खोला। उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढने की जरूरत है।
अर्जक कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष रघुनाथ पटेल ने आगन्तुकों का स्वागत करते हुये कहा कि सावित्रीबाई फुले जब महज नौ साल की थीं तभी उनका विवाह हो गया, वे पढ़-लिख नहीं सकती थीं। उनके पति ज्योतिराव फुले ने उन्हें घर पर शिक्षित करने की जिम्मेदारी ली। जिसके बाद में उन्होंने महाराष्ट्र, विशेष रूप से पुणे में व्याप्त असमानता, पितृसत्ता और सामाजिक उत्पीड़न से लड़ने के लिए काम किया। उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा।
गोष्ठी को मुख्य रूप से ऊषा कुशवाहा, कैसर शहजादी, सत्यराम चौधरी, रामकेवल यादव, रामकेश चौधरी, छट्ठी राम चौधरी, जगन्नाथ मौर्य, झिनकान मौर्य, पल्टूराम, कल्याणनाथ वर्मा आदि ने सम्बोधित करते हुये सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्षो पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सरिता श्रीवास्तव, रामपूरन चौधरी, गिरजाशंकर पटेल, सत्येन्द्र यादव, विन्देश्वरी यादव, अमित कुमार चौधरी, राम सुमेर पटेल, सुभाष चौधरी, विनय मौर्य, आंचल यादव, खुशबू चौधरी, चांदनी, पूजा चौधरी, इशिका, अंशिका पटेल, सोनी, मोनी, मानसी यादव के साथ ही विद्यालय परिवार के अनेक शिक्षक, छात्रायें उपस्थित रहीं।