Sunday, April 14, 2024
साहित्य जगत

हम तुम्हारी प्रतीक्षा में लिख रहे हैं गीत……

हम तुम्हारी प्रतीक्षा में लिख रहे हैं गीत अविरत।
तुम हमारे गीत को आवाज़ देने आओगे न?
तुम बिना निष्प्राण है हर गीत में अब प्राण भर दो
इन विरह गीतों को फिर से तुम मिलन के गीत कर दो
चाहती हूँ जिंदगी प्रतिपल तुम्हारी छाँव में अब
इस तपन में चल सकूँ सामर्थ्य है न पाँव में अब
हे मेरे आराध्य तुमको भावना के पुष्प अर्पित
चाह बस एकमात्र इतनी पा तुम्हे हो जाऊं गर्वित
दुख के इस अंधियार में तुम दीप सुख का लाओगे न?
तुम हमारे गीत को आवाज देने आओगे न?
राम आ जाओ मेरे वनवास का अब अंत कर दो
पतझड़ सरीखा है ये जीवन तुम इसे बसन्त कर दो
हम खरे उतरेंगे चाहे जो भी ले लो तुम परीक्षा
एक बरस एक जन्म या करती रहूँ एक युग प्रतीक्षा
तुम मेरी आधी अधूरी जिंदगी को पूर्ण कर दो
प्रेम का अध्याय यह आ जाओ अब सम्पूर्ण कर दो
खो अगर दोगे हमे हम सा पुनः फिर पाओगे न
तुम हमारे गीत को आवाज देने आओगे न?
डॉ. रोशनी वर्मा,
लखनऊ(उत्तर प्रदेश)