Sunday, April 21, 2024
साहित्य जगत

ज़िद

ज़िद ऐसी करो-
कि आसमां झुक जाए
ज़िद ऐसी करो –
कि पर्वत भी हिल जाए
ज़िद ऐसी करो-
कि धरती भी डोल उठे
ज़िद ऐसी करो-
कि मूक भी बोल उठे
ज़िद ऐसी करो-
कि बर्फ भी जल जाए
ज़िद ऐसी करो-
कि दर्द भी मुस्कराए
ज़िद ऐसी करो-
कि विराना भी गुनगुना उठे
ज़िद ऐसी करो-
कि हर मन नाच उठे
ज़िद अच्छी है यारों
गर ज़िद पर अड़ जाओ ।।
आर्यावर्ती सरोज “आर्या”
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)