Tuesday, April 16, 2024
साहित्य जगत

ग़ज़ल

जा रही हो तो ये बीनाई भी लेती जाना।
दूर तक है मेरी रुसवाई भी लेती जाना।।
लोग पूछेंगे तेरा हाल बेसबब मुझसे।
साथ अपने यह शनासाई भी लेती जाना।।
कौन इस दिल को सम्भालेगा तेरे जाने पर।
अपने दामन में ये सौदाई भी लेती जाना।।
तीरगी से मिरा रिश्ता किये जाना कायम।
तारों की, चाँद की रानाई भी लेती जाना।।
तर्क़ कर लेना मेरी रूह से रिश्ते सारे।
तुमने बख़्शी जो पज़ीराई भी लेती जाना।।
कौन छेड़ेगा मेरे साथ में सरगम अब “ग़ैर “
ये रबाब और ये शहनाई भी लेती जाना। ।
अनुराग मिश्र ” ग़ैर “
जिला आबकारी अधिकारी