Sunday, April 14, 2024
बस्ती मण्डल

कोरोना से, ठीक होकर चलें फर्ज की राह

बस्तीः| कोरोना से ठीक होने के बाद इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोजेक्ट (आईडीएसपी) की पूरी टीम दोगुना दूने उत्साह के साथ अपने काम पर मुस्तैद नजर आ रही है। कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की लड़ाई में आईडीएसपी की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है। कोरोना के गैर उपचारित मरीजों की ट्रेसिंग, जांच की सुविधा मुहैया कराने, मरीज को भर्ती कराने से लेकर उनके सभी रिकार्ड आदि सुरक्षित रखने का काम स्वास्थ्य विभाग का यही विंग कर रहा है।
एसीएमओ व आईडीएसपी के नोडल आफिसर डॉ. सीएल कन्नौजिया, एपिडेमॉलाजिस्ट उमेश कुमार व डेटा इंट्री ऑपरेटर बारी-बारी से कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। आईडीएसपी सेल में काम की अधिकता को देखते हुए स्वास्थ्य व अन्य विभाग के कर्मियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा वहां पर समय-समय पर अधिकारियों व कर्मचारियों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में वहां काम करने वालों के लिए कोरोना से प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
नोडल ऑफिसर डॉ. सीएल कन्नौजिया ने बताया कि इस समय स्वास्थ्य विभाग का ज्यादातर स्टॉफ कोरोना ड्यूटी में लगा हुआ है। मरीज के लगातार संपर्क में आने से कर्मियों के भी पॉजिटिव होने की पूरी संभावना रहती है। हमारा सभी का पहला प्रयास होना चाहिए कि पॉजिटिव होने से खुद को बचाएं। अगर पॉजिटिव हो जाए तो पूरे धैर्य व साहस के साथ रोग का मुकाबला करें। जरा भी घबराना नहीं चाहिए।
खुद का अनुभव बताते हुए डॉ. कन्नौजिया ने कहा कि उनकी जांच रिपोर्ट जब पॉजिटिव आई तो एक समय उन्हें कुछ डर जरूर लगा। अन्य जिलों में उनके साथ के कई चिकित्सक पॉजिटिव हुए और उन्हें बचाया नहीं जा सका था। अपनी 59 साल की उम्र व शुगर मधुमेह आदि की समस्या को लेकर भी वह वे चिंतित थे। इन तमाम चिंताओं बातों के बीच उन्होंने अपनी नियमित दवाओं पर विशेष जोर दिया तथा बुखार आदि की दवाएं समय-समय पर लेते रहे। घर में जहां तक हो सका चलते-फिरते रहे। अपना ध्यान कोरोना की के बजाए अन्य काम की बातों पर ज्यादा लगाया। आईसोलेशन के बाद भी मातहत कर्मियों के संपर्क में रहे तथा उन्हें आवश्यकता पड़ने पर सुझाव देते रहे। यही कारण रहा कि बिना किसी समस्या के वह वे जल्दी स्वस्थ होकर काम पर वापस आ गए।
एपिडमॉलाजिस्ट उमेश कुमार का कहना है कि मार्च से ही वह वे टीम के साथ कोरोना से बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। अपने को बचाने के लिए उन्होंने हमेंशा मॉस्क, सैनिटाइजर के इस्तेमाल और दो गज दूरी का ध्यान रखा। का प्रयोग किया। फिर भी किन्हीं कारणवश वह वे पॉजिटिव हो गए। उन्होंने पॉजिटिव रिपोर्ट को लेकर चिंता नहीं की, क्योंकि उन्हें यह जानकारी थी कि इस बीमारी से ज्यादातर लोग स्वस्थ हो जा रहे हैं। चिकित्सकों के सुझाव पर वह आईसोलेशन में चले गए तथा नियमित दवा खाई। खान-पान पर विशेष ध्यान दिया। रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) के संपर्क में हमेंशा रहे तथा अपनी हालत के बारे में उन्हें सूचना देते रहे। कुछ समय बाद रिपोर्ट निगेटिव आ गई। क्वारंटीन का समय पूरा करने के बाद दोबारा काम पर वापस आ गए हैं।