Sunday, April 21, 2024
साहित्य जगत

मदिरा का मद*

मदिरा में मद रहने वाला
अमृत पान करेगा कैसे ?
घूंट- घूंट अपमानित होकर
खुद का मान करेगा कैसे ?
अपनों को ही छलने वाला
खुद से प्यार करेगा कैसे ?
गहरी नींद में सोने वाला
दुश्मन से लड़ेगा कैसे ?
प्रीति करे जो गद्दारों से
देश से प्रेम रखेगा कैसे ?
जीवन भार समझने वाला
जीवन पार करेगा कैसे ?
खुद उलझा हो खुद ही में जो
जग बेड़ा पार करेगा कैसे ?
गिरकर जो सम्भल सके ना
वो किसको संभाल सकेगा ?
डूब रहा भव सागर में जो
खुद को पार करेगा कैसे ?
प्रीति-रीति जो सीख सका ना
प्रेम गीत गाएगा कैसे ?
बन मेघ घुमडेगा केवल
घन बनकर बरसेगा कैसे ?
मीत को भी जो ठग जाए
शत्रु से प्रीत निभाए कैसे ?
मद – लोभ में होकर लिप्त
प्रभु को प्राप्त करेगा कैसे ?
मदिरा में मद रहने वाला
अमृत पान करेगा कैसे ?
घूंट – घूंट अपमानित होकर
खुद का मान करेगा कैसे ??
आर्यावर्ती सरोज “आर्या”
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)