Saturday, July 20, 2024
Othersसाहित्य जगत

बहुत भयावाह हो गया कोरोना का रोग….

बहुत भयावाह हो गया कोरोना का रोग।
एक एक कर जा रहे इस धरती से लोग।
परिजन कर पाते नहीं लाशों का दीदार।
पत्थर भी रोने लगा सुनकर चीख पुकार।
विखर गया, मुरझा गया उसके मन का फूल।
जिसके पावों में गड़ा कोरोना का शूल।
मानवीय संवेदना का है “वर्मा” लोप।
इसीलिए तो और है प्रकृति नटी का कोप।
आज प्राकृतिक सम्पदा का हो रहा विनाश।
ऐसे में तुम कर रहे “वर्मा” सुख की आस।
डॉ. वी. के. वर्मा
चिकित्साधिकारी
जिला चिकित्सालय बस्ती