Sunday, April 14, 2024
साहित्य जगत

आज के ताजा दोहे

कोरोना का हो गया उन पर ही अभिशाप।
जो देते थे नसीहत बच कर रहिए आप।
जो देते थे नसीहत हुए वही बीमार।
अपने जीवन से गए आज बेचारे हार।
धरती पर अब बढ़ गया अनाचार का बोझ।
इसीलिए यह आपदा कहर ढा रही रोज।
नीरस जीवन किस तरह हो “वर्मा” व्यतीत।
अब तो दुर्लभ हो गया जीवन का संगीत।
कोरोना के कहर से सागर हुआ उदास।
बोला अब आती नहीं नदियां मेरे पास।
डॉ. वी. के. वर्मा
चिकित्साधिकारी
जिला चिकित्सालय बस्ती