Wednesday, April 17, 2024
राजनैतिक

कृषि विधेयक को लेकर राष्ट्रपति कोविंद से मिले गुलाम नबी आजाद, 16 विपक्षी पार्टियों ने सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली | इन्दु/नवीन बंसल (राजनीतिक संपादक) कृषि विधेयकों को लेकर देश भर के किसानों में रोष भरा हुआ है। जगह- जगह किसान इस बिल को लेकर अपना विरोध जता रहे हैं। बिल को कानून न बनाया जाए इसे लेकर किसान लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष भी किसानों का समर्थन कर रहा है।
बीते रोज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कृषि विधेयकों और ऊपरी सदन के आठ सांसदों के निलंबन के मुद्दों पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। विपक्ष की करीब 16 पार्टियों ने इन मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है।
इससे पहले फैसला हुआ था कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर सदन में सदस्यों की संख्या के आधार पर पांच प्रमुख विपक्षी दलों- कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति और द्रमुक के पांच प्रतिनिधि राष्ट्रपति के साथ मुलाकात के लिए जाएंगे।
बहरहाल, तृणमूल कांग्रेस ने आग्रह किया था कि उसकी जगह किसी छोटी पार्टी के प्रतिनिधि को भेजा जाए क्योंकि कृषि विधेयकों के खिलाफ लड़ाई मिलकर लड़ी गई है और यह प्रयास सदन में संख्या के आधार पर निर्भर नहीं करता है। विपक्षी दल इस बात पर एकमत थे कि वे इस मुलाकात से किसी पार्टी को अलग नहीं रखना चाहते, लेकिन कोरोना संकट से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है।
संसद से पारित कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन परिसर में मौन विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन कर रहे सांसद अपने हाथों में तख्तियां लिए हुए थे जिन पर किसानों को बचाओ, मजदूरों को बचाओ, लोकतंत्र को बचाओ जैसे नारे लिखे थे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिभा से भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तक मार्च निकाला। वे कुछ देर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कतारबद्ध होकर खड़े हुए। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, भाकपा, माकपा, द्रमुक, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया