-पिता का सपना, बेटे ने किया साकार! बस्ती में शिक्षा का नया मॉडल तैयार
बस्ती। पूर्वांचल के ‘मालवीय’ कहे जाने वाले पंडित सूर्य नारायण चतुर्वेदी का सपना था कि समाज का कोई भी वर्ग शिक्षा से वंचित न रहे। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है और समाज को नई दिशा देती है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने जीवनकाल में दर्जनों शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना कर क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाई।
उनके निधन के बाद इस विरासत को आगे बढ़ाने का बीड़ा उनके पुत्र एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख नाथनगर राकेश चतुर्वेदी ने उठाया। उन्होंने अपने पिता के अधूरे सपनों को साकार करने के उद्देश्य से शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। पैरामेडिकल कॉलेज, अस्पताल और एकेडमी की स्थापना के बाद उन्होंने यह महसूस किया कि क्षेत्र में एक ऐसे इंग्लिश मीडियम स्कूल की आवश्यकता है, जहाँ हर वर्ग के बच्चे न्यूनतम खर्च पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त कर सकें।
इसी सोच को साकार रूप देते हुए वर्ष 2021 में चौबेगंज स्थित राजन इंटरनेशनल एकेडमी की स्थापना की गई। शुरुआत से ही इस संस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई। सबसे खास बात यह रही कि प्रवेश शुल्क पूरी तरह निःशुल्क रखा गया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके। इसके साथ ही कॉपी-किताब पर 50 प्रतिशत की छूट देकर एक नया उदाहरण पेश किया गया।
राकेश चतुर्वेदी के इस प्रयास में उनकी पत्नी शिखा चतुर्वेदी ने प्रबंध निदेशक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं कार्यकारी निदेशक संजीव पाण्डेय और प्रधानाचार्य सानू एंटोनी ने मिलकर एक मजबूत शैक्षणिक टीम तैयार की। योग्य और अनुभवी शिक्षक-शिक्षिकाओं का चयन कर संस्थान को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र बनाया गया।
एकेडमी की प्रगति के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी खुद बयां करते हैं। सत्र 2021-22 में जहाँ 500 छात्रों ने नामांकन कराया, वहीं 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 1500 हो गई। इसके बाद 2023-24 में 2000, 2024-25 में 2300 और 2025-26 में 2800 छात्रों ने प्रवेश लिया। वर्तमान सत्र 2026-27 में यह संख्या 3000 के पार पहुँच चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि अभिभावकों का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है।
प्रबंध निदेशक शिखा चतुर्वेदी ने बताया कि एकेडमी का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान दादाजी के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। वर्तमान में एकेडमी में 3000 से अधिक छात्र अध्ययन कर रहे हैं और 100 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएँ आधुनिक तकनीकों के माध्यम से शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
कार्यकारी निदेशक संजीव पाण्डेय ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही संस्थान की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि समय के साथ बदलती तकनीकों को ध्यान में रखते हुए छात्रों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ा जा रहा है। सत्र 2026-27 में कंप्यूटर साइंस के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंग्लिश स्पीकिंग पर विशेष फोकस किया जाएगा, जिससे छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
प्रधानाचार्य सानू एंटोनी ने बताया कि एकेडमी अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और अभिभावकों का विश्वास बनाए रखना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नए सत्र में छात्रों के लिए कई नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं। कंप्यूटर कोर्स के साथ AI तकनीक की जानकारी, इंग्लिश स्पीकिंग क्लासेस और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस सत्र में भी प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा और फीस में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। कॉपी-किताब पर 50 प्रतिशत की छूट पहले की तरह जारी रहेगी। इसके अलावा 25 किलोमीटर के दायरे में आने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें स्कूल के वाहनों को GPS सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत रह सकें।
संस्थान में हर महीने छात्रों का मूल्यांकन टेस्ट लिया जाता है और हर तीसरे महीने शिक्षक-अभिभावक बैठक आयोजित की जाती है, जिससे छात्रों की प्रगति पर नियमित निगरानी रखी जा सके। मेधावी छात्रों को समय-समय पर पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया जाता है।
सुविधाओं की बात करें तो पूरा कैंपस वातानुकूलित है। यहाँ क्रिकेट एकेडमी, अत्याधुनिक साइंस लैब, दो कंप्यूटर लैब, इंडोर गेम्स, प्रेयर ग्राउंड, स्मार्ट क्लासेस और न्यूज़ पेपर रीडिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य छात्रों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है।
संस्थान प्रबंधन का कहना है कि अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उनकी प्राथमिकता है और आगे भी इसी दिशा में कार्य जारी रहेगा। राजन इंटरनेशनल एकेडमी आज न केवल बस्ती, बल्कि पूरे पूर्वांचल में शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल बनती जा रही है, जहाँ हर वर्ग के बच्चों को समान अवसर प्रदान किया जा रहा है।
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