Tuesday, April 16, 2024
राजनैतिक

भाजपा ने लागू की ईस्ट इंडिया कंपनी की नीतियां: अशोक तंवर

सिरसा,| न्दु/नवीन बंसल (राजनीतिक संपादक) पूर्व सांसद डॉ. अशोक तंवर ने कहा कि देश में भाजपा की गलत नीतियों के चलते मानो अंग्रेजी शासन एक बार फिर लौट आया है और ईस्ट इंडिया कंपनी की नीतियां लागू होने की शुरूआत हो चुकी है।
वे मंगलवार को अनाजमंडी स्थित द आढतियान एसोसिएशन के चल रहे धरने को अपना समर्थन देते हुए उपस्थितजनों को संबोधित कर रहे थे। डॉ. तंवर ने कहा कि वर्तमान भाजपा शासन में जिस प्रकार किसानों, आढतियों, मजदूरों पर कुठाराघात किया जा रहा है, वह तानाशाही सरकार की परिचायक है। उन्होंने कहा कि फूट डालो राज करो की नीति पर चल रही भाजपा ने आढतियों व किसानों के परस्पर भाईचारे को खत्म करने की दिशा में कदमताल की है जिसे पूरी एकजुटता से कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक आढती कम से कम 150 से 200 लोगों को रोजगार देने का काम करता है और पूरे हरियाणा में करीब 25 से 30 हजार आढतियों के कंधों पर हजारों परिवारों का पेट पल रहा है। कोरोना काल में बेरोजगारी की गंभीर होती स्थिति के चलते पहले से ही लोगों में मौजूदा सरकार के प्रति रोष है, वहीं आढतियों व किसानों के आपसी संबंधों पर कुठाराघात किए जाने से ये आक्रोश अब चरम पर है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार बीती 5 जून को ही कृषि संबंधी विधेयक लेकर आई थी और तभी से आढती व किसान सड़कों पर उतर आए थे, मगर उसी दौर में सभी राजनीतिक दल भी पूरी एकजुटता से सड़कों पर आते तो शायद भाजपा के इतने हौंसले न होते कि वह ये किसान व आढती विरोधी विधेयक सदन में प्रस्तुत करती। डॉ. अशोक तंवर ने कहा कि मौजूदा तानाशाही सरकार को उखाड़ फैंकने के लिए शहीद उधम सिंह, शहीद भगत सिंह व राजगुरु सरीखे देशभक्तों के पुन: जन्म लेने की जरूरत है। पूर्व सांसद ने कहा कि भाजपा आज अंबानी, अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के हाथों की कठपुतली बनी हुई है और उन्हीं को लाभान्वित करने के लिए नीतियां बनाकर लागू की जा रही हैं। उन्होंने अपनी ओर से आढतियों को अपना पूरा समर्थन देने की बात कही।

बाद में डॉ. अशोक तंवर ने लघु सचिवालय में चल रहे कृषकों एवं सरकार की ओर से बर्खास्त किए गए शारीरिक शिक्षकों के धरने को भी समर्थन दिया। उन्होंने इस अवसर पर केंद्र व प्रदेश सरकार को हिटलरशाही की द्योतक बताते हुए कहा कि अपनी गलत नीतियों के प्रभाव के कारण किसानों, व्यापारियों व कर्मचारियों पर जमकर जुल्म ढहाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीनों अध्यादेशों को कृषि व कृषकों को समाप्त करने के अध्यादेश बताए।