Tuesday, April 16, 2024
राजनैतिक

हरियाणा में कृषि विधेयकों को लेकर कांग्रेस कर रही विरोध प्रदर्शन, जगह-जगह दिग्गज नेता रहे शामिल

चंडीगढ 21 सितम्बर 2020 इन्दु/नवीन बंसल (राजनीतिक संपादक) लोकसभा के बाद राज्यसभा में कृषि बिल पास होने पर हरियाणा में कांग्रेस आज जगह- जगह विरोध प्रदर्शन कर रही है। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शामिल हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत, कार्यसमिति के सदस्य कुलदीप बिश्नोई हिसार और कुमारी सैलजा जींद में प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व पर कर रहे हैं।
सोनीपत पहुंचे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कषि बिल किसानों और आढ़तियों के हितैषी नहीं है। हुड्डा ने कहा कि सरकार किसानों को मारने का काम कर रही है। हुड्डा ने कहा कि किसान संगठनों को कांग्रेस का पूरा समर्थन है। उन्होंने कहा कि सरकार MSP को लेकर चौथा बिल भी लाए।
जींद में कृषि अध्यादेशों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षा कुमारी सैलजा ने कहा कि कृषि प्रधान देश में अन्नदाताओं के खिलाफ षड्यंत्र रचकर भाजपा सरकार ने हमारे देश की आत्मा पर प्रहार किया है। यह बिल कृषि क्षेत्र को पूंजीपतियों के हाथों में गिरवी रखने वाले हैं।
कृषि अध्यादेश को लेकर आज पंचकूला में कांग्रेस ने जमकर प्रदर्शन किया। यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। कांग्रेसियों ने कृषि अध्यादेश के कानून को वापस लेने की की मांग। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चौ चंद्रमोहन, कालका के विधायक चौधरी, कांग्रेस प्रवक्ता रंजीता मेहता, कांग्रेस प्रवक्ता संजीव भारद्वाज व सैंकड़ों कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में शामिल रहे।
वहीं, झज्जर में कांग्रेस विधायकों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विधायक डॉ. रघुबीर सिंह कादियान एवं कुलदीप वत्स ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम डीसी जितेंद्र दहिया को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने इसे पूरी तरह से किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि सरकार किसान विरोधी है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए। बताया कि भारत के जिस भी राज्य में कांग्रेस की सरकार है वहां पर इस अध्यादेश को कैंसिल कर दिया गया है और कांग्रेस पार्टी किसानों के हित के लिए सड़क से लेकर संसद तक पूरी शिद्दत के साथ यह लड़ाई लड़ेगी।
वहीं, कांग्रेस महासचिव एवं कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा है कि मोदी सरकार ने किसानों की जमीन और उनकी उपज नए जमीदारों यानी पूंजीपतियों को सौंपने का कानून बना दिया है। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र सिंह हुड्डा कोरोना संक्रमित होने की वजह से उपचाराधीन हैं। अस्पताल से ही जारी एक बयान में दीपेंद्र ने कहा कि किसान विरोधी कानून पास होने से एमएसपी, सरकारी खरीद, मंडी व्यवस्था और पीडीएस सिस्टम पर बड़ा प्रहार होगा। कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि नए क़ानूनों के जरिये सरकार ने किसानों को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की तरफ कदम बढ़ाया है।
पानीपत में कांग्रेस ने अध्यादेश के विरोध में प्रदर्शन किया गया और जिला उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौपा। कृषि अध्यादेश को तुगलकी फरमान बताया । सरकार को फेल बताते हुए कहा सरकार को सवांद और बड़ी-बड़ी बातें करने आती है । हरियाणा कांग्रेस प्रभारी विवेक बंसल ने कहा कि इस सरकार की असफलताओं के बारे में वह पृरी दिल्ली में सुनते थे लेकिन आज यहां आकर अपने कार्यकर्ताओं से बात की तो पता चला कि यह तो उससे भी ऊपर है।
केंद्र सरकार द्वारा तीन कृषि अध्याय देशों को लागू करने के विरोध में आज फरीदाबाद के कांग्रेसियों ने किसानों व आढ़तियों के साथ मिलकर सेक्टर-12 लघु सचिवालय के समक्ष धरना दिया और मोदी व खट्टर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेसी नेताओं ने इन अध्यादेशों को किसानों के विरोधी बताते हुए सरकार को चेतावनी दी। इस मौके पर काफी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा कांग्रेसी काफी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा कांग्रेसी ट्रैक्टर पर सवार होकर और हाथ में काले गुब्बारे लेकर धरना स्थल तक पहुंचे।
पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा ने कहा कि इन क़ानूनों से सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि आढ़ती समेत हर उस गरीब आदमी को बड़ा नुकसान होगा, जिसे राशन कार्ड पर आटा, अनाज और दाल मिलते हैं। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी और सीटू हरियाणा की अध्यक्ष सुरेखा व महासचिव जय भगवान ने बताया कि तीन लेबर कोड बिल 19 सितंबर को लोकसभा में केंद्रीय श्रम मंत्री ने पेश किए हैं। इन बिलों से छंटनी का रास्ता खुलेगा। इनके विरोध में राज्य में 23 सितंबर को प्रदर्शन होंगे।
हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला ने कहा कि लोकसभा के बाद राज्यसभा में पारित किसान विधेयक देश में पिछले 50 से अधिक वर्षों में स्थापित हुई कृषि व्यवस्था को बर्बाद कर देंगे। दो कृषि विपणन विधेयकों से किसानों को मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य और उनकी सरकारी खरीद की प्रणाली खत्म हो जाएगी। किसानों के साथ आढ़ती और छोटे व्यापारी भी बर्बाद हो जाएंगे