Sunday, April 21, 2024
बस्ती मण्डल

जिले के गरीब,बेसहारा और पीड़ितों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं तो युवाओं के लिए भी उनका सेवाभाव बना प्रेरणा का जरिया

संतकबीरनगर।(जितेन्द्र पाठक)| आज जिले के गॉवों और कस्बों में एक ही नाम चर्चा में है डा0उदय प्रताप चतुर्वेदी । हो भी क्यों नहीं जब भी उन्होंने किसी गरीब,पीड़ित और बेसहारा की पीड़ा सुनी वहॉ दौड़े चले गए । मौके पर पहुंचकर उसकी आर्थिक मदद के साथ पीड़ित परिजनो को सांत्वना भी दी । ऐसा एक नहीं दर्जनों मामलों में उन्होंने मसीहा बनकर पीड़ित परिवारों का दु:ख ओढ़ लिया । बीते दिनो लाकडाउन के दौरान तरयापार गॉव में बेसहारा हुए दो मासूमो का उस समय सहारा बन गए जब परिवार में मासूमो की बूढ़ी दादी के सिवा कोई नहीं रहा । काल के क्रूर प्रहार ने परिवार के कमाऊं और जिम्मेदारों को छीन लिया । बेसहारा हुए मासूमो के पालन पोषण और शिक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं रही । हर ओर मायूसी ही मायूसी नजर आ रही थी । जानकारी होने पर डा0उदय प्रताप चतुर्वेदी पीड़ित मासूमो के घर पहुंचे और मासूमों के साथ उनकी दादी को सांत्वना दी । घर में हर चीज की व्यवस्था के साथ आर्थिक मदद दी । दोनो मासूमो को अपने शिक्षण संस्थान एसआर एकेडमी में दाखिला कराया । उनकी शिक्षा और घर की सभी जरूरतों को पूरा करने का जिम्मा उठाया । आज भी उन मासूमों से लगातार सम्पर्क कर उनका कुशलक्षेम और उनकी पढ़ाई लिखाई के बारे में पूछते हैं । जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी भेजते रहते हैं । छितहीं गॉव के गरीब मंगल की मदद का वाकया हो या मझौवा एकडंगा के मजदूर की हर जगह पीड़ित परिवारो के दुख में शरीक होकर उनकी मदद की । वर्षों से प्लास्टिक की पन्नी तानकर जीवन बसर कर रहे चंदापार के एक परिवार को उसके सपनो की आशियाना मिला । नैनाझाला गॉव के दलित अमरनाथ की मौत से दुखी परिवार को आर्थिक मदद करते हुए हर संभव सहयोग का वादा किया । नीबाहोरिल गॉव में मृतक मजदूर के घर टीम उदय ने पहुंचकर आर्थिक मदद की । लाकडाउन की वजह आर्थिक रूप से पीड़ित युवाओं का सहयोग कर उन्हे रोजगार के लिए प्रेरित किया । नैनाझाला गॉव में हैंडलूम चला रहे युवाओं का हाल पूछा और उन्हे भी आर्थिक सहयोग दिया । इन सबके बावजूद उन्होंने कई और पीड़ित और मजलूम को मदद पहुंचाई । लोगों की पीड़ा मे शामिल होने की चर्चा हर गली कूचे में है । समाज मे नेक कार्यों के लिए शायर की चंद पंक्तियॉ समर्पित । ——-जिंदगी में काम करो ऐसा कि पहचान बन जाए,——
इस तरह से चलो कि निशान बन जाए।
—जिंदगी तो काट लिया करते हैं सभी,—– इस तरह से चलो कि मिशाल बन जाए ।