Tuesday, April 16, 2024
राजनैतिक

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने फिर किया 3 कृषि अध्यादेशों के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन के समर्थन का ऐलान

चंडीगढ़ इन्दु/नवीन बंसल (राजनीतिक संपादक)| पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 3 नए कृषि अध्यादेश के ख़िलाफ़ जारी किसान आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया है। इससे पहले भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा अलग-अलग मंचों से इन तीन अध्यादेशों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करते रहे हैं। हुड्डा का स्पष्ट कहना है कि ये आंदोलन सिर्फ किसान का ही नहीं, इसमें मजदूर, आढ़ती और छोटे व्यापारी भी शामिल हैं। सभी का मानना है कि बिना MSP के ये अध्यादेश किसानहित में नहीं हैं। अगर सरकार इन्हें लागू करना चाहती है तो सबसे पहले इसमें MSP पर ख़रीद का प्रावधान शामिल करना चाहिए। या उसके लिए अलग से चौथा बिल लाना चाहिए। बिल में स्पष्ट प्रावधान हो कि अगर कोई एजेंसी MSP से नीचे किसान की फसल ख़रीदती है तो उसके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई होगी।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी को अपना वादा पूरा करते हुए किसानों को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के सी2 फार्मूला के तहत MSP देनी चाहिए। जब तक किसान की पूरी लागत को ध्यान में रखते हुए MSP तय नहीं होती, तब तक किसानों की आय नहीं बढ़ सकती।
कांग्रेस सरकार के दौरान अलग-अलग फसलों के MSP में रिकॉर्ड 2 से 3 गुना की बढ़ोतरी हुई थी। गन्ना, गेहूं, धान आदि के रेट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी करते हुए किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए क़दम उठाए गए थे। लेकिन इस सरकार ने MSP देने की बजाए किसान के जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। 3 कृषि अध्यादेशों को लेकर किसानों का सीधा आरोप है कि बिना MSP और किसी तरह के सरकारी नियंत्रण वाले इन अध्यादेश के जरिए मंडी और MSP व्यवस्था को ख़त्म करने की कोशिश की जा रही है। बार-बार विरोध करने के बावजूद सरकार इन अध्यादेशों को तानाशाही तरीके से थोपना चाहती है। इसीलिए किसान को मजबूर होकर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। लेकिन सरकार कोरोना का डर दिखाकर उसकी आवाज़ को दबाना चाहती है। हुड्डा ने सवाल उठाया कि अगर सरकार को कोरोना या किसान की इतनी ही चिंता है तो इन 3 अध्यादेशों को लागू करने के लिए कोरोना काल को ही क्यों चुना गया? क्यों नहीं स्थिति के सामान्य होने का इंतज़ार किया गया? क्यों नहीं इन बिलों को लागू करने से पहले संसद और विधानसभा में चर्चा करवाई गई?
पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने कहा कि मौजूदा सरकार शुरुआत से ही MSP विरोधी रही है। क्योंकि इन बिलों से पहले भी मौजूदा सरकार किसानों को MSP दने में नाकाम थी। किसान को उसकी फसल का भाव देने के बजाय सरकार धान, चावल, सरसों और बाजरा ख़रीद जैसे घोटालों को अंजाम देने में लगी थी। आज भी मंडियों में 1509 और परमल धान पिट रही है। हमारी सरकार के दौरान 1509 धान 4000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकती थी, लेकिन आज उसकी बिकवाली सिर्फ 1800 से 2100 रुपये के बीच हो रही है। परमल के लिए तो किसान को MSP भी नहीं मिल पा रही है और मजबूरी में उसे अपना पीला सोना 1100 से 1200 रुपये में बेचना पड़ रहा है। धान ही नहीं बाजरा किसानों के साथ भी ऐसा ही अन्याय हो रहा है। 2150 रुपये MSP वाला बाजरा 1200 से 1300 रुपये में बिक रहा है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आज ना किसान को MSP मिल रहा है, ना वक्त पर पेमेंट और ना ही फसल बीमा योजना का मुआवज़ा। पहले से बदहाल किसान को सरकार 3 अध्यादेशों के जरिए पूरी तरह पूंजी पतियों के हवाले करना चाहती है। लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी। कांग्रेस कंधे से कंधा मिलाकर किसानों के साथ खड़ी है। सड़क से लेकर सदन तक, विधानसभा से लेकर संसद तक किसान की आवाज़ को उठाया जाएगा।